UpdateMarts
Follow Channel

25 October 2026

UP में 3 नए Greenfield Expressways: यूपी में बनेंगे 3 नए एक्सप्रेसवे, 650 गांवों से गुजरेगा नेटवर्क, इन जिलों को मिलेगा फायदा

UP Greenfield Expressways: यूपी में बनेंगे 3 नए एक्सप्रेसवे, 565 KM लंबा होगा नेटवर्क; जमीन अधिग्रहण पर खर्च होंगे ₹15,000 करोड़ से ज्यादा

UP Expressway News: उत्तर प्रदेश में सड़क और परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए तीन नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे विकसित करने की योजना है। इन परियोजनाओं के तहत करीब 565 किलोमीटर लंबा नया एक्सप्रेसवे नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के संबंधित क्षेत्रों में लगभग 8,200 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने की योजना है। जमीन अधिग्रहण पर 15,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान बताया गया है।


प्रस्तावित एक्सप्रेसवे से प्रदेश के करीब 650 गांवों और उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के क्षेत्रों को जोड़ने की योजना है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य यात्रियों की आवाजाही आसान बनाने के साथ माल ढुलाई और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति देना है।

यूपी में बनेंगे ये 3 नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) इन तीनों परियोजनाओं को विकसित कर रही है। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की लंबाई इस प्रकार है:

एक्सप्रेसवे का नामप्रस्तावित लंबाई
विंध्य एक्सप्रेसवे320 किलोमीटर
मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे145 किलोमीटर
विंध्य पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे100 किलोमीटर
कुल लंबाई565 किलोमीटर

इन परियोजनाओं के पूरा होने पर उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण कार्य की शुरुआत, पूरा होने की समय-सीमा और अन्य तकनीकी विवरणों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक घोषणाओं से की जानी चाहिए।

1. विंध्य एक्सप्रेसवे: सोनभद्र तक बढ़ेगा एक्सप्रेसवे नेटवर्क

प्रस्तावित तीन परियोजनाओं में विंध्य एक्सप्रेसवे सबसे लंबा होगा। इसकी कुल लंबाई करीब 320 किलोमीटर बताई गई है। योजना के अनुसार, यह गंगा एक्सप्रेसवे को प्रयागराज, भदोही और मिर्जापुर के रास्ते सोनभद्र तक आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

इस परियोजना के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश के 109 गांवों में लगभग 4,615 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने की योजना है।

विंध्य क्षेत्र में बेहतर सड़क संपर्क से स्थानीय लोगों, व्यापारियों और मालवाहक वाहनों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र के विभिन्न जिलों के बीच यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सकती है।

2. मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे: पश्चिमी यूपी को मिलेगा फायदा

मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे की प्रस्तावित लंबाई करीब 145 किलोमीटर है। इसका उद्देश्य गंगा एक्सप्रेसवे के नेटवर्क को मेरठ से उत्तराखंड के हरिद्वार तक विस्तारित करना है।

इस परियोजना के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमरोहा और बिजनौर जिलों के 184 गांवों के अलावा हरिद्वार जिले में भी जमीन अधिग्रहित करने की योजना है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस हिस्से के लिए करीब 2,020 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता बताई गई है।

इस एक्सप्रेसवे से मेरठ, बिजनौर, अमरोहा और हरिद्वार के बीच संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इससे यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और माल परिवहन को भी सुविधा मिल सकती है।

3. विंध्य पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे

तीसरी परियोजना विंध्य पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे है, जिसकी प्रस्तावित लंबाई करीब 100 किलोमीटर है।

यह लिंक एक्सप्रेसवे पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र के बीच सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की योजना का हिस्सा है। इससे दूसरे एक्सप्रेसवे और प्रमुख मार्गों के साथ बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस परियोजना के अंतर्गत आने वाले गांवों और जमीन अधिग्रहण की अलग-अलग विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

जमीन अधिग्रहण पर खर्च होंगे ₹15,000 करोड़ से अधिक

तीनों ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए लगभग 8,200 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने की योजना बताई गई है। एक अंग्रेजी समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन अधिग्रहण पर सरकारी खजाने से 15,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है।

जमीन अधिग्रहण इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण चरण होगा। इसके बाद संबंधित परियोजनाओं की विस्तृत कार्ययोजना, निर्माण प्रक्रिया और अन्य आवश्यक मंजूरियों के आधार पर आगे की प्रगति तय होगी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि जमीन अधिग्रहण का अनुमानित खर्च और परियोजना की कुल निर्माण लागत अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की बताई गई राशि को केवल जमीन अधिग्रहण से संबंधित अनुमान के रूप में समझना चाहिए।

यूपी की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा?

राज्य सरकार की व्यापक बुनियादी ढांचा विकास योजना में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का महत्वपूर्ण स्थान है। बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक क्षेत्रों, व्यापारिक केंद्रों और कृषि उत्पादों के परिवहन को सुविधा मिल सकती है।

इन परियोजनाओं से संभावित लाभ इस प्रकार हैं:

  • विभिन्न जिलों के बीच यात्रा आसान होना।

  • मालवाहक वाहनों की आवाजाही में सुविधा।

  • औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना।

  • पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी।

  • सड़क नेटवर्क के माध्यम से क्षेत्रीय विकास को गति मिलने की उम्मीद।

एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में इन परियोजनाओं को वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य से भी जोड़ा गया है।

गंगा एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा नया नेटवर्क

प्रस्तावित परियोजनाओं में विंध्य एक्सप्रेसवे और मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार से जोड़ने की योजना बताई गई है। इससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के बीच लंबी दूरी की सड़क यात्रा और माल परिवहन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, तीनों परियोजनाओं के अंतिम अलाइनमेंट, जमीन अधिग्रहण, निर्माण की शुरुआत और संचालन की तारीखों से जुड़ी जानकारी के लिए UPEIDA की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है।

 

उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे, मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे और विंध्य पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे राज्य के सड़क नेटवर्क के विस्तार की महत्वपूर्ण योजनाएं हैं। इनकी कुल प्रस्तावित लंबाई करीब 565 किलोमीटर है। लगभग 8,200 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण और 15,000 करोड़ रुपये से अधिक के अनुमानित खर्च के साथ ये परियोजनाएं क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार की जा रही हैं।

महत्वपूर्ण: परियोजनाओं की लंबाई, जमीन अधिग्रहण और अनुमानित खर्च से संबंधित आंकड़े उपलब्ध समाचार विवरण पर आधारित हैं। इन्हें अंतिम सरकारी स्वीकृति या निर्माण पूरा होने की पुष्टि न माना जाए।