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06 November 2026

पंचायत चुनाव तीन महीने में कराने के आदेश के बीच प्रधानों को राहत, प्रशासक पर नया प्रस्ताव


यूपी में पंचायत चुनाव तीन महीने में कराने के हाईकोर्ट के आदेस के बाद भी फिलहाल वोटिंग पर सस्पेंस बना हुआ है। इस बीच प्रधानों के लिए राहत की खबर है। पंचायती राज ‌विभाग ने प्रशासक के पद पर प्रधानों के कार्यकाल को अगले छङ महीनों के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। विभाग की तरफ से इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। प्रशासक पद पर प्रधानों का छह महीने का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है।

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यूपी में 57694 ग्राम प्रधानों को 26 मई को प्रशासक के पद पर नियुक्त किया गया था। छह महीने या उससे पहले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने तक इन्हें प्रशासक के पद पर तैनात किया गया था। अब छह महीने का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। ऐसे में फिर कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।


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माना जा रहा है कि इतनी जल्दी पंचायत चुनाव भी नहीं हो पाएंगे। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की अभी तक ओबीसी आरक्षण पर रिपोर्ट भी नहीं आई है। राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन पहले ही बिना ओबीसी आरक्षण तय किए चुनाव न कराने की मांग कर चुका है। ऐसे में पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि ग्राम प्रधानों का फिर प्रशासक पद का कार्यकाल बढ़ाया जाएगा।

हाईकोर्ट ने भी फैसले को सही बताया था
हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पिछले महीने 25 मई 2026 के उस सरकारी आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया, जिसके तहत कार्यकाल समाप्त होने पर निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया था। कोर्ट ने माना कि यह एक अस्थायी व्यवस्था है और स्थानीय ग्रामीणों की सुविधा के लिहाज से यह निर्णय अनुचित नहीं है।

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हाईकोर्ट ने तीन महीने में चुनाव का दिया है आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले महीने 14 अक्टूबर को पंचायत चुनाव पर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए तीन महीने में चुनाव कराने का राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को आदेश दिया था। कोर्ट ने सर्वे के नाम पर चुनाव टालने को असंवैधानिक कहा था। स्पष्ट किया था कि यह चुनाव मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत ही कराए जाएंगे। इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित 27 प्रतिशत आरक्षण भी शामिल रहेगा।


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कोर्ट ने कहा था कि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की जांच लंबित होने के आधार पर ओबीसी आरक्षित सीटों को सामान्य सीट नहीं माना जाएगा। चुनाव मौजूदा 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण व्यवस्था के तहत ही होंगे। साथ ही एससी, एसटी और महिलाओं के लिए लागू आरक्षण नियमों का भी पालन किया जाएगा।

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