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03 January 2026

नई शिक्षा नीति में बड़ा बदलाव, अब डिग्री के साथ कौशल विकास पर रहेगा फोकस

 

नई दिल्ली।

देश की शिक्षा व्यवस्था को रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़े बदलाव की तैयारी में है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब केवल डिग्री आधारित पढ़ाई के बजाय कौशल विकास, इंटर्नशिप और व्यावहारिक प्रशिक्षण को शिक्षा का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।



केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि बदलते समय में युवाओं के लिए केवल शैक्षणिक प्रमाण पत्र पर्याप्त नहीं हैं। उन्हें उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप व्यवहारिक ज्ञान और काम करने की दक्षता भी हासिल करनी होगी। इसी उद्देश्य से स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को आईटीआई और उद्योग जगत से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।


सरकार का लक्ष्य है कि विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ तकनीकी और व्यावसायिक कौशल भी विकसित करें, ताकि शिक्षा पूरी होते ही उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। इसके लिए शिक्षा प्रणाली में इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा दिया जाएगा।


शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक देश की शिक्षा व्यवस्था किताबों और परीक्षाओं तक सीमित रही है। नई पहल से छात्रों की सोच, कार्यक्षमता और आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।


इसके साथ ही, शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में तकनीक आधारित शिक्षा से सीखने के तरीके अधिक आधुनिक और प्रभावी होंगे, जिससे छात्र भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकेंगे।


कुल मिलाकर, यह बदलाव भारत की शिक्षा प्रणाली को कौशल-आधारित और रोजगार-उन्मुख बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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