लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में तैनात काफी शिक्षक लंबे समय से बीएलओ के काम में लगे हैं। शिक्षक संगठनों ने कहा है कि इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
इसे देखते हुए शिक्षकों को बीएलओ के काम से मुक्त करना चाहिए। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि दो महीने से चल रहे एसआईआर के कारण कहीं एक शिक्षक तो कहीं शिक्षामित्र के सहारे स्कूल हैं। ऐसे में बच्चे आते हैं और खेलकूद कर चले जाते हैं। जाड़े की छुट्टियों के बाद परिषदीय विद्यालयों में 24 जनवरी से द्वितीय सत्र की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। उसके बाद 27 जनवरी से निपुण आकलन होना है। बिना शिक्षक कैसी परीक्षाएं और कैसा आकलन, क्योंकि एसआईआर का काम 28 फरवरी तक होना है। शिक्षकों के गैर शैक्षणिक कार्यों में लगने पर से नकारात्मक संदेश जाता है कि वे स्कूल नहीं आते हैं।

