01 January 2026

नए बरस में खूब बरसें नौकरियां, किन भूमिकाओं में बढ़ेगी मांग, कहां होंगी ज्यादा नियुक्तियां?

 

नए साल 2026 में देश की 52 प्रतिशत कंपनियां नई भर्तियां करने की तैयारी में हैं। यह पिछले साल की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है। साल 2025 में युवाओं की बड़ी मांग रही है कि उन्हें रोजगार और काम-धंधे मिलें। सरकारों ने भी वादे किए हैं। ऐसे में, नौकरी के बाजार में बहार की उम्मीद है। कैसे और कहां मिलेंगी नौकरियां? कैसे कौशल पर ध्यान देना होगा? पेश है एक आकलन

भारत का रोजगार परिदृश्य 2026 की शुरुआत में सकारात्मक संकेत दे रहा है। मैनपावरग्रुप के ताजा एम्प्लॉयमेंट आउटलुक सर्वे के अनुसार, देश की 52 प्रतिशत कंपनियां अगले तीन महीने में नई भर्तियां करने की योजना बना रही हैं, जो पिछले साल की तुलना में 30% और पिछली तिमाही के मुकाबले 27%अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक टेक्नोलॉजी, स्किल और टैलेंट पर बढ़ता फोकस भारत को वैश्विक स्तर पर सबसे तेज भर्ती करने वाले देशों में शामिल कर रहा है। यह नियोक्ताओं के बढ़ते भरोसे व बदलते नौकरी बाजार की ओर संकेत करता है। इसी बदलाव के साथ नौकरी की परिभाषा भी बदल रही है। अब काम को घंटों की मौजूदगी से नहीं, बल्कि नतीजों व प्रभाव से आंका जा रहा है। संगठन नई तकनीकों, खासकर एआई को अपनाते हुए कामकाज के तरीके नए सिरे से गढ़ रहे हैं-


काम में एआई का बढ़ता दखल


2026 में एआई शेड्यूल बनाना, दस्तावेज तैयार करना, मीटिंग नोट्स संक्षेप करना और शोध जैसे रूटीन काम संभालेगी। इससे कर्मचारी उन कामों पर ध्यान दे सकेंगे, जिनमें रचनात्मकता, सोच और समस्या-समाधान की क्षमता की जरूरत होती है। एसएपी लैब्स इंडिया की एमडी सिंधू गंगाधरण के अनुसार, ‘हर भूमिका में एआई के साथ काम करने की समझ जरूरी हो चुकी है। यह केवल टेक प्रोफेशनल्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हर इंडस्ट्री की जरूरत बन गया है।’


सॉफ्ट स्किल्स से बनेगा फर्क


तकनीकी कौशल आपको प्रतियोगिता में दूसरों से अलग बनाने के लिए काफी नहीं रह गए हैं, क्योंकि एआईऔर डिजिटल टूल्स ने इन्हें सबके लिए आसान और सामान्य कर दिया है। ये होना जॉब के लिए जरूरी है, लेकिन अब कंपनियां ऐसे लोगों को प्राथमिकता दे रही हैं, जो सही फैसले ले सकें, टीम के साथ काम कर सकें, बदलावों को संभाल सकें और एआई से मिली जानकारी को समझकर सही तरीके से इस्तेमाल कर सकें। तकनीकी क्षमता के साथ भावनात्मक समझ अब उतनी ही जरूरी हो गई है।


लगातार अपस्किलिंग की जरूरत


नई तकनीकें, खासकर एआई, इतनी तेजी से बदल रही है कि कभी-कभार ट्रेनिंग अब पीछे छूट गई है। मिंट के आलेख में सिद्धार्थ ठाकुर, निदेशक, ग्रासिक सर्च, के अनुसार कर्मचारियों को प्रासंगिक बने रहने के लिए लगातार नई तकनीकें सीखनी होंगी। इस साल सीखना और भी आसान और लचीला बनेगा। छोटे-छोटे कोर्स, खुद से सीखने की पहल और रोजमर्रा के काम में नए प्रयोग इसमें शामिल होंगे। जो कंपनियां भी, इस संस्कृति को अपनाएंगी, वे ज्यादा मजबूत और अनुकूल टीम बना पाएंगी।


कामकाज के नए मानक


सालाना मूल्यांकन की जगह काम का निरंतर आकलन होगा। काम, उपलब्धियों, नई पहल आदि पर अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच खुलकर चर्चा करेंगे। करियर में बढ़ोतरी और नए अवसर अब इस बात पर निर्भर करेंगे कि कर्मचारी ने किन प्रोजेक्ट्स पर काम किया, क्या अनुभव हासिल किया और प्रदर्शन कैसा रहा। तेजी, लचीलापन और परिणाम केंद्रित काम अब पेशेवर सफलता की नई पहचान हैं। (मिंट)


क्यों सीएस और आईटी सुरक्षित


इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2026 बताती है कि कंपनियां तेजी से एआई, एडवांस्ड एनालिटिक्स और क्लाउड अपना रही हैं। ऐसे में डिजिटल व तकनीकी समझ रखने वाले ग्रेजुएट्स की मांग बढ़ती रहेगी। आईटी सेक्टर आज भी नए ग्रेजुएट्स को सबसे ज्यादा नौकरियां देता है। करीब 35% नए ग्रेजुएट्स की भर्तियां यहीं होती हैं। इस कारण सीएस और आईटी ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी के अवसर लगातार मौजूद हैं।


किनके लिए क्या संकेत


छात्रों के लिए सीएस और आईटी अब भी सुरक्षित विकल्प हैं, खासकर डाटा, एआई और ऑटोमेशन से जुड़े क्षेत्रों में। वोकेशनल व कॉमर्स कोर्सेज की मांग बीएफएसआई और ऑपरेशंस में बढ़ रही है, जबकि इस रिपोर्ट के अनुसार एमबीए की लोकप्रियता में अब थोड़ी कमी आती दिख रही है। अब सिर्फ एमबीए की डिग्री भर नहीं, बल्कि साथ में एनालिटिक्स और डिजिटल स्ट्रैटेजी में विशेषज्ञता को वरीयता दी जाएगी।



किन भूमिकाओं में बढ़ेगी मांग, कहां होंगी ज्यादा नियुक्तियां?

●एआई का उपयोग: 44 फीसदी कंपनियां पहले से एआई का इस्तेमाल कर रही हैं। 37 फीसदी जल्द अपनाने वाली हैं।


●तकनीकी और डाटा रोल की मांग: बीएफएसआई, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्र रोजगार बढ़ाएंगे। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, साइबर सिक्योरिटी और एआई/एमएल प्रोफाइल्स, ग्रीन एनर्जी इंजीनियर्स, प्रोडक्ट मैनेजमेंट, टेलीहेल्थ कोऑर्डिनेटर्स, बायोइन्फॉर्मेटिक्स विशेषज्ञ जैसी भूमिकाओं और कौशल की ज्यादा मांग होगी।


●छोटे शहरों में भर्ती में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की संभावना। यह कुल नौकरियों का 32 फीसदी हो सकता है। (स्रोत : इंडिया डिकोडिंग जॉब्स 2026)