राजस्व परिषद जमीन की पैमाइश में लेखपालों व कानूनगो के खेलों पर अंकुश लगाने के लिए अब तकनीक का सहारा लेगा। जीपीएस आधारित रोवर मशीन के माध्यम से प्रदेश की सभी तहसीलों में पैमाइश कराई जाएगी। इसके लिए हर तहसील स्तर पर विशेष टीमों का भी गठन होगा। सभी तहसीलों में इस प्रणाली के उपयोग के लिए लगभग 350 रोवर खरीदे जाएंगे। इनकी खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
रोवर सेटेलाइट के माध्यम से सर्वे आफ इंडिया के डाटा के जरिए किसी भी भूमि की पैमाइश करने के साथ ही उसका सटीक मानचित्र भी तैयार करने में सक्षम होगा। रोवर से पैमाइश करने के लिए गांव के सीमा स्तंभ की आवश्यकता नहीं होगी। राजस्व परिषद के अध्यक्ष अनिल कुमार का कहना है कि रोवर के माध्यम से बिना फिक्स प्वांइट के किसी भी जमीन की पैमाइश पांच सेंटीमीटर तक की एक्यूरेसी के साथ करना संभव होगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत कई गांवों में इसका सफल परीक्षण भी किया जा चुका है। मुख्यमंत्री योगी ने राजस्व वादों के प्रभावी निस्तारण का निर्देश भी दिया था। राजस्व के विवादों में भूमि पैमाइश के मामलों में खासकर लेखपाल व कानूनगो की भूमिका पर सर्वाधिक सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नई तकनीक कारगर साबित होगी।
एक रोवर की कीमत करीब छह लाख रुपये
राजस्व परिषद रोवर के उपयोग के लिए एसओपी भी बना रहा है। रोवर के माध्यम से किसी भूमि का क्षेत्रफल निकालने में त्रुटि की गुंजाइश भी नहीं रहेगी। एक रोवर की अनुमानित कीमत छह से सात लाख रुपये है। रोवर के माध्यम से पैमाइश में पांच से 10 मिनट का समय लगेगा। इसके उपयोग से भूमि पैमाइश के मामलों का तेज गति से निस्तारण भी किया जा सकेगा।

