हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें

10 March 2026

कुछ अलग: पब-बार के लिए बच्चों के सुकून से समझौता नहीं

 

दिल्ली हाईकोर्ट ने


पब और बार के कारण स्थानीय नागरिकों, खासकर बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि पब या बार चलाने का अधिकार पूर्ण नहीं है, इसे नागरिकों के शांत, शोरमुक्त और सुरक्षित वातावरण में रहने के अधिकार के साथ संतुलित किया जाना चाहिए।


न्यायमूर्ति पुरुषैन्द्र कुमार कौरव की पीठ ने कहा कि इस संतुलन को बनाए रखने की जिम्मेदारी आबकारी आयुक्त की है। बार या पब को मंजूरी देने से पहले संबंधित इलाके के माहौल और आसपास रहने वाले लोगों की स्थिति का आकलन बेहद जरूरी है। संचालन के दौरान नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी भी आयुक्त का दायित्व है।


अदालत ने कहा कि दायर की गई याचिका से स्पष्ट है कि संबंधित क्षेत्र में चल रहे बार या पब से आसपास के बच्चे प्रभावित हो रहे हैं और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने ऐसे माहौल की अनुमति देने से इनकार किया।


पीठ ने आबकारी आयुक्त को निर्देश दिया कि याचिका को शिकायत के रूप में लेकर मामले की जांच कर उचित आदेश जारी करें।


आरके आश्रम स्टेशन के पास बार को लेकर याचिका


यह याचिका आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन स्थित एक बार के संचालन को लेकर दायर की गई। आरोप है कि बार तय समय से देर तक खुला रहता है। इस कारण आसपास के लोगों को परेशानी होती है। इस संबंध में पुलिस आयुक्त को कई शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।


Guruji Portal: Hindi Notes| Free Exam Notes |GS Notes| Quiz| Books and lots more