10 March 2026

जोर पकड़ रहा TET अनिवार्यता का विरोध, उत्तर प्रदेश में अब चरणबद्ध आंदोलन करेंगे शिक्षक

परिषदीय विद्यालयों में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है।



अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने सभी संबद्ध संगठनों को साथ लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार की है। महासंघ में कुल 20 संगठन जुड़े हुए हैं।


आंदोलन के पहले चरण में नौ मार्च से 15 मार्च तक ‘शिक्षक की पाती’ अभियान चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से शिक्षक अपनी बात केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। दूसरे चरण में 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकाला जाएगा।

 

तीसरे चरण में तीन मई को लखनऊ में रैली आयोजित कर एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद चौथे चरण में संसद का घेराव करने की योजना है।


महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पहले से नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जिन शिक्षकों की सेवा पांच वर्ष से अधिक हो चुकी है, उनके लिए सेवा में बने रहने या पदोन्नति हेतु टीईटी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य किया गया है।


ऐसे में केंद्र सरकार को शिक्षकों की परिस्थितियों को देखते हुए टीईटी अनिवार्यता से राहत देनी चाहिए।




परिषदीय विद्यालयों में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है।


अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने सभी संबद्ध संगठनों को साथ लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार की है। महासंघ में कुल 20 संगठन जुड़े हुए हैं।


आंदोलन के पहले चरण में नौ मार्च से 15 मार्च तक ‘शिक्षक की पाती’ अभियान चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से शिक्षक अपनी बात केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। दूसरे चरण में 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकाला जाएगा।


तीसरे चरण में तीन मई को लखनऊ में रैली आयोजित कर एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद चौथे चरण में संसद का घेराव करने की योजना है।


महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पहले से नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जिन शिक्षकों की सेवा पांच वर्ष से अधिक हो चुकी है, उनके लिए सेवा में बने रहने या पदोन्नति हेतु टीईटी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य किया गया है।


ऐसे में केंद्र सरकार को शिक्षकों की परिस्थितियों को देखते हुए टीईटी अनिवार्यता से राहत देनी चाहिए।