गोंडा: आगरा में हुए एक स्कूल बस हादसे में एक बच्ची की मृत्यु के बाद, परिवहन विभाग ने खटारा वाहनों के संचालन में स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करने का निर्णय लिया है। तीन बार नोटिस के बावजूद खटारा वाहनों का संचालन करा रहे प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों से एआरटीओ ने शपथ पत्र मांगा है। हादसे की स्थिति में स्कूल प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों की जिम्मेदारी होगी।
12 मार्च को आगरा के एत्मादपुर में आरबीएस हायर सेकेंडरी स्कूल की बस से एक छात्रा गिर गई, जिसके बाद बस का पहिया उसके ऊपर चढ़ गया। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने जांच के दौरान बस में तकनीकी खराबी पाई। इस
घटना के बाद, परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने चार यात्री-माल कर अधिकारियों को निलंबित कर दिया। इसके बाद, विभाग ने खटारा स्कूली वाहनों के संचालन में विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। देवीपाटन मंडल के चारों जिलों में 1800 वाहन
पंजीकृत हैं, जिनमें से 500 अनफिट हैं। गोंडा जिले में 750 पंजीकृत वाहनों में 75 से अधिक स्कूली वाहन अनफिट पाए गए हैं। बच्चों को घर और स्कूल लाने वाले इन खटारा वाहनों की फिटनेस के लिए विभाग ने तीन बार नोटिस भेजा है। अन्य तीन जिलों (बलरामपुर,
बहराइच और श्रावस्ती) की स्थिति भी इसी प्रकार की है, जहां विद्यालय प्रबंधन अनफिट वाहनों की फिटनेस नहीं करा रहा है, जिससे हादसों का खतरा बढ़ता जा रहा है। गोंडा में 52 वाहनों के पंजीकरण निलंबित किए जा चुके हैं।
एआरटीओ आरसी भारतीय ने बताया कि आगरा में हुई घटना को ध्यान में रखते हुए, खटारा स्कूली वाहनों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों से लिखित संकल्प पत्र भरवाया जाएगा। इसमें वे यह लिखित शपथ देंगे कि उनका स्कूली वाहन, जो लंबे समय से अनफिट है, उससे छात्र-छात्राओं को स्कूल और घर पहुंचाने का कार्य नहीं किया जाएगा। यदि इस वाहन से कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी उनकी होगी।
66 खटारा स्कूली वाहनों के संचालन के लिए विद्यालय प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराने के लिए सभी सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
राजेश मौर्य, आरटीओ प्रशासन

