प्रयागराज बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में नियुक्त सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के आदेश के विरोध में शिक्षक संगठनों ने गतिविधियां तेज कर दी हैं।
अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के घटक संगठनों की एक बैठक में महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से अवगत कराया। बताया कि सात नवंबर-2024 को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया था कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसके नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता। साथ ही चयन प्रक्रिया के बीच योग्यता में परिवर्तन को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन माना गया था। इस तरह इस निर्णय को टीईटी की अनिवार्यता मामले में साक्ष्य के रूप में सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत कर कानूनी लड़ाई लड़ने का निर्णय किया गया।
बैठक में शिक्षक संगठनों ने कानूनी रणनीति पर चर्चा की। बताया गया कि टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में योजित (दाखिल) की गई हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि नया आदेश 25-30 वर्ष पहले नियुक्त शिक्षकों की योग्यता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, जिससे उनके अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध बताया है। प्रदेश संयोजक के अनुसार यदि मामले की सुनवाई ओपन कोर्ट में होती है तो शिक्षकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं का एक प्रभावी पैनल खड़ा किया जाएगा। पहले से कार्यरत शिक्षकों के हितों में ठोस और तथ्यात्मक तर्क प्रस्तुत किए जाएंगे। उन्होंने पूर्व के फैसलों के आधार पर शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद जताई है। कहा कि पौने दो लाख से ज्यादा शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है।

