📰 जनगणना प्रशिक्षण में अव्यवस्थाओं पर उठे सवाल, ‘लूट’ जैसे हालात के आरोप
जलालपुर (अंबेडकरनगर)। भारत सरकार द्वारा कराए जा रहे जनगणना व मकान सूचीकरण से जुड़े तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में अव्यवस्थाओं को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रशिक्षण में शामिल सुपरवाइजरों और गणनाकारों ने आरोप लगाया है कि प्रशिक्षण के नाम पर मिलने वाली राशि में कटौती की जा रही है, जबकि भोजन, नाश्ता और आवश्यक अध्ययन सामग्री की समुचित व्यवस्था भी नहीं की गई।
प्रतिभागियों के अनुसार, प्रशिक्षण के पहले दिन कार्यक्रम की शुरुआत करीब 11:30 बजे हुई। इसके बाद केवल एक बार हल्का नाश्ता दिया गया, जबकि भोजन की व्यवस्था देर शाम लगभग 4:30 बजे की गई। भोजन की गुणवत्ता भी बेहद खराब बताई गई। कई प्रतिभागियों का कहना है कि उन्हें पॉलीथिन में थोड़ी सब्जी और मात्र चार पूड़ियां दी गईं, जिससे नाराज होकर कई लोग बीच में ही प्रशिक्षण छोड़कर घर लौट गए।
प्रशिक्षुओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा प्रतिदिन 600 रुपये मानदेय निर्धारित है, लेकिन उसमें से लगभग 200 रुपये खाने-पीने और अन्य व्यवस्थाओं के नाम पर काट लिए जाते हैं। इसके बावजूद न तो उचित नाश्ता मिल रहा है और न ही संतोषजनक भोजन। उनका कहना है कि यह स्थिति प्रशिक्षण के नाम पर ‘लूट’ जैसी प्रतीत होती है।
तकनीकी और शैक्षणिक व्यवस्थाओं को लेकर भी नाराजगी सामने आई है। प्रतिभागियों के मुताबिक, प्रशिक्षण में उपयोग होने वाला मोबाइल ऐप कई फोन में सही तरीके से काम नहीं कर रहा, जिससे प्रशिक्षण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। साथ ही, जनगणना और मकान सूचीकरण से संबंधित कोई विस्तृत बुकलेट भी उपलब्ध नहीं कराई गई, केवल एक पेन और पतली डायरी देकर काम चलाया जा रहा है।
प्रतिभागियों का कहना है कि यदि सभी को प्रशिक्षण से संबंधित बुकलेट उपलब्ध करा दी जाए, तो विषय को समझना आसान हो जाएगा।
गौरतलब है कि इस प्रशिक्षण में नगर पालिका क्षेत्र से 97 और ग्रामीण क्षेत्र से करीब 1080 प्रतिभागी शामिल हैं। प्रशिक्षण में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इस संबंध में नोडल अधिकारी निखिलेश कुमार ने बताया कि तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए पत्राचार किया गया है और जल्द ही सभी कमियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

