अब ऑनलाइन व्यवस्था के बीच ऑफलाइन समायोजन चर्चा में
उच्च शिक्षा विभाग में अध्यापकों के तबादलों पर उठे सवाल
प्रयागराज। प्रदेश सरकार की नई स्थानांतरण नीति लागू होने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती में बड़ा फेरबदल किया है। ऑनलाइन स्थानांतरण प्रक्रिया की समय-सारिणी जारी होते ही करीब 230 शिक्षकों के स्थानांतरण आदेश जारी किए गए। इससे व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। चर्चा इस बात की है कि कई स्थानांतरण ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ऑफलाइन स्तर पर किए गए हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार कुछ ऐसे शिक्षकों का भी स्थानांतरण किया गया है, जिनकी तैनाती लंबे समय से नए खुले राजकीय महाविद्यालयों में थी। हालांकि विभाग का कहना है कि छात्र संख्या और शिक्षकों की आवश्यकता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
दूरदराज के कॉलेजों में तैनाती बड़ी चुनौती
उच्च शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती दूरस्थ क्षेत्रों के महाविद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश शिक्षक शहर या शहर के आसपास के महाविद्यालयों में तैनाती चाहते हैं। दूरदराज के कॉलेजों में जाने के लिए बहुत कम आवेदन आते हैं।
उदाहरण के तौर पर लखीमपुर खीरी, ललितपुर, झांसी, हरदोई जैसे जिलों के कुछ महाविद्यालयों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक रायबरेली के हर्षपुर निसरथा राजकीय महाविद्यालय में छात्र संख्या कम होने के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक तैनात थे।
46 नए कॉलेजों में भी स्टाफ संतुलन की कवायद
प्रदेश में हाल के वर्षों में 46 नए राजकीय महाविद्यालय खोले गए हैं। इनमें कई कॉलेजों में छात्र संख्या काफी कम है, जबकि कुछ पुराने महाविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। इसी असंतुलन को दूर करने के लिए विभाग ने स्थानांतरण प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है।
स्थानांतरण नियमों के तहत ही प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जहां छात्र संख्या कम है, वहां से शिक्षकों को उन महाविद्यालयों में भेजा जा रहा है, जहां छात्रों की संख्या अधिक है और शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। ऑनलाइन आवेदन के 29 मई तक तबादला आदेश डाउनलोड किए जा सकेंगे।
डॉ. वीणा शर्मा, निदेशक उच्च शिक्षा ने कहा कि स्थानांतरण व्यवस्था में यह प्रावधान है कि किसी महाविद्यालय में दो से कम शिक्षक होने की स्थिति में वहां से शिक्षक को कार्यमुक्त नहीं किया जाता। वहीं ऑफलाइन समायोजन में छात्र संख्या, विषयवार आवश्यकता और संस्थान की वास्तविक जरूरतों को आधार बनाया जा रहा है।

