11 July 2026

68500 शिक्षक भर्ती में ओबीसी अभ्यर्थियों को 5% अर्हता छूट देने की राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति बरकरार

आरक्षण अधिनियम का उल्लंघन करने वाले अधिकारी, कर्मचारियों पर कार्रवाई को भी कहा



लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने 68500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2018 से संबंधित मामले में निर्णय करते हुए पूर्व में 05 जनवरी 2022 को दी गई संस्तुति को पुनः यथावत प्रभावी रखने का निर्णय लिया है। साथ ही आरक्षण नियमों का पालन न करने वाले अधिकारी/कर्मचारियों पर कार्रवाई के भी कड़े निर्देश दिए हैं।

आयोग की 16 जून को हुई बैठक में पारित निर्णय में कहा है कि राज्य अध्यापक शिक्षा परिषद की अधिसूचना व उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली के अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थियों को अर्हता अंकों में 5 प्रतिशत की छूट दिया जाना विधि सम्मत है। आयोग ने कहा कि 68500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2018 में ओबीसी अभ्यर्थियों को 150 में 60 अंक (40 प्रतिशत) प्राप्त होने पर उत्तीर्ण माना जाए।

आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि तद्नुसार परीक्षा परिणाम संशोधित कर उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की सूची आयोग को उपलब्ध कराई जाए। यह भी उल्लेख किया कि 69000 सहायक अध्यापक भर्ती, जूनियर (एडेड) सहायक अध्यापक भर्ती तथा सहायक अध्यापक भर्ती-2021 में भी ओबीसी अभ्यर्थियों को अर्हता अंक में 5 प्रतिशत की छूट दी गई थी। ऐसी स्थिति में केवल 68500 भर्ती 2018 के ओबीसी अभ्यर्थियों को इस लाभ से वंचित रखना संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 में निहित समानता व समान अवसर के अधिकार के विपरीत है।

आयोग ने कहा कि शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए अभिलेखों तथा न्यायालयों के आदेशों का परीक्षण करने पर यह तथ्य सामने नहीं आया जिससे यह सिद्ध हो कि 68500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2018 में ओबीसी अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत अर्हता छूट देने पर कोई कानूनी प्रतिबंध या न्यायिक रोक है।

2200 ओबीसी अभ्यर्थी होंगे प्रभावित

इस प्रकरण की पैरवी कर रहे अभ्यर्थी विकास सिंह ने बताया कि 68500 पदों के सापेक्ष भर्ती में 1.07 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें ओबीसी और सामान्य वर्ग समान थे। सभी के लिए लिखित परीक्षा हुई थी। पहली मेरिट में 41256 और पुनर्मूल्यांकन के बाद 4200 और अभ्यर्थी पास हुए थे। हाईकोर्ट के आदेश पर बाद में भी इसमें कुछ और भी वृद्धि हुई। उन्होंने बताया कि 2018, 2019 और 2023 में भी यही व्यवस्था रही है। उनके अनुसार इससे अभी भी ओबीसी के 9800 और ओवरऑल 20 हजार से अधिक सीटें हैं, जबकि आयोग के निर्णय से लगभग 2200 ओबीसी अभ्यर्थी प्रभावित होंगे। विकास सिंह ने कहा कि आयोग ने दूसरी बार ओबीसी अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों को स्वीकार किया है। प्रदेश सरकार आयोग की संस्तुतियों का तत्काल अनुपालन करते हुए संशोधित परीक्षा परिणाम घोषित करे।

आयोग ने यह भी कहा है कि 05 जनवरी 2022 की आयोग की संस्तुति तथा उसके अनुपालन संबंधी पत्रों पर समय से कार्रवाई न करने वाले आरक्षण अधिनियम का उल्लंघन करने वाले संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाए।

आयोग के इस निर्णय से कई वर्षों से संघर्ष कर रहे ओबीसी अभ्यर्थियों में नई उम्मीद जगी है। आयोग ने सचिव मनोज कुमार तथा उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को बैठक की संस्तुतियां भेजते हुए इस पर कार्रवाई करते हुए आयोग को भी अवगत कराने का निर्देश दिया है।