, प्रयागराज : सीबीएसई ने त्रिभाषा नीति को और स्पष्ट करते हुए दिशानिर्देश जारी किए हैं। वर्तमान में कक्षा दस में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को नई भाषा नीति का पालन नहीं करना है। अभी जो विद्यार्थी कक्षा सात, आठ और नौ में हैं, वे जब दसवीं में जाएंगे तब उन्हें तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। वर्तमान में कक्षा सात, आठ और नौ के जिन विद्यार्थियों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे उन्हीं दो विदेशी भाषाओं का अध्ययन जारी रखेंगे। उन्हें एक अतिरिक्त भारतीय भाषा जोड़नी होगी। स्कूलों को निर्देशित किया गया है कि कक्षा स्तर के अनुसार अध्ययन सामग्री छात्र-छात्राओं को उपलब्ध कराई जाए।
एनपीएस पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य संजय श्रीवास्तव कहते हैं कि सीबीएसई ने नई शिक्षा नीति में तीन भाषाओं के अध्ययन की बात कही है। इसमें दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। इस कदम से विद्यार्थियों को अलग-अलग भाषाओं में दक्ष बनाया जा सकेगा। सीखने और विकास की प्रक्रिया भी संतुलित होगी। माध्यमिक स्तर अर्थात नौवीं और दसवीं में तीसरी भाषा का समावेश, मध्य स्तर अर्थात कक्षा छह से आठ तक भाषा समझ का विस्तार करने का प्रयास हो रहा है।
• सीबीएसई ने कहा- स्कूल कक्षा स्तर के अनुसार अध्ययन सामग्री दें
• पूर्ववत दो भाषाओं की पढ़ाई करेंगे वर्तमान में कक्षा दस के विद्यार्थी
आंतरिक स्तर पर होगा तीसरी भाषा का मूल्यांकन
सत्र 2026-27 के कक्षा नौ के विद्यार्थियों को ध्यान रखना होगा कि तीसरी भाषा का मूल्यांकन विद्यालय द्वारा असाइनमेंट आदि के तौर पर आंतरिक स्तर पर होगा। जब यह बैच 2027-28 में अर्थात कक्षा दस में पहुंचेगा, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। यही वजह है कि सीबीएसई व एनसीईआरटी ने तीसरी भाषा के अध्ययन के लिए कक्षा स्तर के अनुरूप अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सत्र 2026-27 में कक्षा सात और आठ के जो विद्यार्थी हैं, वे जब नौवीं और दसवीं में पहुंचेंगे तब तीन भाषाओं का अध्ययन करेंगे। उनमें दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।
शैक्षिक सत्र 2026-27 से विद्यालयों में भाषा नीति के क्रियान्वयन के लिए कार्य शुरू हो चुका है। वर्तमान सत्र 2026-27 के विद्यार्थियों को पूर्ववत दो भाषाओं की व्यवस्था के अनुसार पढ़ाई करनी है। उन्हें तीसरी भाषा का चुनाव नहीं करना है।
कक्षा नौ अर्थात सत्र 2026-27 के विद्यार्थी तीन भाषाओं का चयन कर पढ़ाई करेंगे। उन्हें हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, ओड़िया, असमिया आदि में से कोई दो भाषाओं का चुनाव और गैर-भारतीय भाषाओं जैसे अंग्रेज़ी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी, स्पेनिश आदि में से एक भाषा की पढ़ाई करनी है।
यदि कोई विद्यार्थी पहले से दो भारतीय भाषाएं पढ़ रहा है तो तीसरी भाषा के रूप में अंग्रेज़ी, फ्रेंच आदि का चुनाव कर सकता है। यदि कोई एक भारतीय भाषा व एक विदेशी भाषा पढ़ रहा है तो उसे कोई दूसरी भारतीय भाषा चुननी होगी। यदि कोई विद्यार्थी पहले से दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहा है तो उसे सत्र 2026-27 में एक बार की विशेष छूट के तहत दोनों विदेशी भाषाओं का अध्ययन जारी रखने की अनुमति होगी, लेकिन तीसरी भाषा भारतीय होना आवश्यक है।

