01 August 2026

लोकसभा से जन्म और मृत्यु पंजीकरण विधेयक को मंजूरी मिली, यह हुआ बदलाव

 जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। शुक्रवार को लोकसभा ने बिना चर्चा के जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी।



नए नियम के तहत अगर किसी जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन दो साल से ज्यादा देर से कराया जाता है, तो प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इससे फर्जी प्रमाणपत्र और गलत रजिस्ट्रेशन पर रोक लगेगी, वहीं एक साल से दो साल तक की देरी वाले मामलों में प्रशासनिक मंजूरी की व्यवस्था जारी रहेगी। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में विधेयक को पारित करने के लिए पेश किया। राज्यसभा में बीते 29 जुलाई को यह विधेयक पारित किया गया था।


यह हुआ बदलाव : अभी के नियमों के मुताबिक अगर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक साल से ज्यादा समय बाद कराया जाता है तो जिला मजिस्ट्रेट, उप जिला मजिस्ट्रेट की मंजूरी लेनी पड़ती है। नए संशोधन के बाद एक साल से दो साल तक की देरी वाले मामलों में यही व्यवस्था जारी रहेगी, लेकिन दो साल से ज्यादा पुराने मामलों में अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। केंद्र का मानना है समय पर रजिस्ट्रेशन न होने से कई गड़बड़ियों की संभावना बनी रहती है।


अगर माता-पिता, अस्पताल या संबंधित व्यक्ति निर्धारित समय सीमा के भीतर जन्म या मृत्यु की सूचना नहीं देते या गलत तथ्य देते हैं, तो एक हजार का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं अगर पंजीकरण अधिकारी बिना किसी कारण से प्रमाण पत्र जारी करने में देरी करते हैं, या मना करता है तो कार्रवाई होगी।


प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी

केंद्र सरकार के अनुसार, जन्म और मृत्यु का सही रिकॉर्ड किसी भी देश की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी होता है। जनगणना, स्वास्थ्य योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और सरकारी नीतियों के लिए सही आंकड़े जरूरी हैं। अगर जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड समय पर दर्ज नहीं होता है तो सरकारी डेटा प्रभावित होता है। इसके अलावा गलत प्रमाणपत्रों के जरिए धोखाधड़ी की संभावना भी बढ़ जाती है।


किसलिए बनाया गया


● राशन कार्ड, पेंशन, अन्य सरकारी योजनाओं में मृत व्यक्तियों के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े को रोकना।


● एनपीआर, राशन कार्ड और आधार डेटा को रियल-टाइम में अपडेट रखना, ताकि सटीक आंकड़े मिले।


देश स्तर पर केंद्रीय डिजिटल डाटाबेस तैयार होगा



● कई कार्यों के लिए एकल पहचान और आयु प्रमाण के रूप में मान्य होगा। इसमें स्कूल और कॉलेजों में दाखिला, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना, मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना, आधार कार्ड जारी करना, शादी का पंजीकरण, सरकारी नौकरियों में नियुक्ति और पासपोर्ट शामिल है।


● जब कोई नागरिक 18 वर्ष का होगा, तो जन्म डेटाबेस के आधार पर उसका नाम मतदाता सूची में जोड़ने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।


● अस्पतालों द्वारा सीधे पोर्टल पर जानकारी दर्ज होने से परिजनों को बीमा क्लेम, संपत्ति के नामांतरण में कागजी झंझट नहीं होगी।


यह नया कानून जन्म, मृत्यु पंजीकरण के पुराने ढांचे को आधुनिक और डिजिटल बनाने के लिए लाया गया है। इससे देश स्तर पर जन्म और मृत्यु का एक केंद्रीय डिजिटल डाटाबेस तैयार होगा। डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र अब किसी भी नागरिक की पहचान, आयु व जन्मस्थान का सर्वमान्य प्रमाण होगा।