प्रयागराज,। सूबे में पंचायत चुनाव समय पर न हो पाने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के कारण आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया आयोग की संस्तुतियों पर निर्भर है। दूसरा, राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तिथि 10 जून 2026 निर्धारित किए जाने के कारण 26 मई 2026 से पूर्व पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं था। यह खुलासा राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका पर दाखिल जवाब में किया है।
एडीसी के विधि छात्रों युधिष्ठिर वर्मा एवं आयुष पांडेय की जनहित याचिका में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद समय पर चुनाव न कराए जाने को चुनौती दी है। जनहित याचिका में कहा गया है कि पंचायतों का संवैधानिक कार्यकाल समाप्त होने के बाद निर्वाचित ग्राम प्रधानों को उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 12(3-ए) के तहत प्रशासक नियुक्त किया जाना संविधान के अनुच्छेद 243-ई की भावना के विपरीत है।
अपने जवाब में राज्य सरकार ने चुनाव में हुई देरी का कारण पिछड़ा वर्ग आयोग की प्रक्रिया ओर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तिथि को भी चुनाव न करा पाने का आधार बनाया है। राज्य सरकार के इस विस्तृत जवाब पर अगले सप्ताह में मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई होगी। इससे पूर्व याचियों को राज्य सरकार के काउंटर एफिडेविट का बिंदुवार उत्तर प्रस्तुत करना है।

