18 September 2026

इंचार्ज प्रधानाध्यापकों के वेतन-एरियर पर बड़ा अपडेट, हाईकोर्ट ने एरियर की अवधि को लेकर दिया नया आदेश

 

इंचार्ज प्रधानाध्यापकों के वेतन-एरियर पर बड़ा अपडेट, हाईकोर्ट ने एरियर की अवधि को लेकर दिया नया आदेश

लखनऊ। इंचार्ज प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रधानाध्यापक पद का वेतन और एरियर दिए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एकल पीठ ने त्रिपुरारी दुबे मामले में निर्धारित तीन वर्ष की एरियर सीमा के संदर्भ में अलग व्यवस्था करते हुए इंचार्ज प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यभार संभालने की तिथि से वेतन-एरियर के दावे पर विचार करने का आदेश दिया है।


यह मामला इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को उच्च पद के वेतनमान से संबंधित है। इससे पहले त्रिपुरारी दुबे मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने यह माना था कि यदि शिक्षक उच्च पद के प्रधानाध्यापक का कार्य कर रहा है और कानूनी बाधा नहीं है, तो उसे उस पद के वेतन का अधिकार हो सकता है। हालांकि, उस फैसले में एरियर को रिट याचिका दाखिल करने से पहले के तीन वर्ष तक सीमित किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज की थी SLP

त्रिपुरारी दुबे मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की गई थी। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, 13 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने SLP खारिज कर दी थी।

इसके बाद भी इंचार्ज प्रधानाध्यापकों के वेतन और एरियर से जुड़े मामलों में हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं सामने आती रही हैं। जुलाई 2026 के एक मामले में भी लखनऊ बेंच ने संबंधित अधिकारियों को त्रिपुरारी दुबे के फैसले और लागू नियमों के अनुसार इंचार्ज प्रधानाध्यापक के वेतन के दावे पर विचार करने का निर्देश दिया था।

माया बनर्जी केस का भी उल्लेख

प्राप्त सूचना के अनुसार, नई याचिका में सुप्रीम कोर्ट के माया बनर्जी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया फैसले का हवाला दिया गया है। अगस्त 2026 के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पारिवारिक पेंशन के बकाये को केवल बाद की तारीख से सीमित करने के बजाय पात्रता उत्पन्न होने की मूल तिथि से लाभ दिए जाने के मुद्दे पर फैसला किया था।

हालांकि, इंचार्ज प्रधानाध्यापक वाले नए आदेश की प्रमाणित प्रति उपलब्ध होने पर ही यह निश्चित रूप से कहा जा सकेगा कि अदालत ने त्रिपुरारी दुबे मामले की तीन वर्ष वाली सीमा को किस कानूनी आधार पर और किस सीमा तक बदला है।

सूचना: यह अपडेट अधिवक्ता दुर्गा प्रसाद शुक्ल, इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से प्रेषित जानकारी तथा उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर तैयार किया गया है।



Big breaking....🚩

प्रभारी प्रधानाध्यापक/ प्रधानाध्यापिका मामले में माननीय न्यायमूर्ति श्री पंकज भाटिया ने सहायक अध्यापक/अध्यापिका जब से प्रभारी प्रधानाध्यापक / प्रधानाध्यापिका के पद पर कार्य कर रहे हैं, तब से प्रधानाध्यापक/प्रधानाध्यापिका का वेतन देने का आदेश कर दिया है। 

न्यायमूर्ति श्री भाटिया ने कहा कि एकल पीठ में न्यायमूर्ति श्री पीयूष अग्रवाल ने शुरू से वेतन देने का आदेश किया था जिसे कि डिवीजन बेंच ने तरसेम सिंह केस का हवाला देकर तीन वर्ष के लिए सीमित कर दिया था, लेकिन तरसेम सिंह केस का फैसला माया बनर्जी केस में पलटा जा चुका है। इसलिए माया बनर्जी केस का हवाला देकर फिर से शुरू से वेतन देने का आदेश कर दिया है। 

राहुल पांडे अविचल