04 September 2026

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: एससी अभ्यर्थी को एसटी पद पर नियुक्ति का अधिकार नहीं

 

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: एससी अभ्यर्थी को एसटी पद पर नियुक्ति का अधिकार नहीं

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित पद पर चयनित अभ्यर्थी को केवल परिस्थितियों के आधार पर अनुसूचित जनजाति (एसटी) के पद पर नियुक्ति का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता।


कोर्ट ने यह फैसला भूपेंद्र कुमार की याचिका पर सुनाया। याचिका में एसटी वर्ग के लिए आरक्षित सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि चयन सूची की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद दूसरी सूची के आधार पर नियुक्ति का दावा नहीं किया जा सकता।

मामला वर्ष 2015 में प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों के 15 हजार पदों की भर्ती से संबंधित था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि एसटी वर्ग के लिए आरक्षित चार पद योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने के कारण खाली रह गए थे। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इससे एससी वर्ग के अभ्यर्थी को उन पदों पर नियुक्ति का अधिकार प्राप्त नहीं होता।

तीन साल काम करने के बाद भी नियमित नियुक्ति का अधिकार नहीं

एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत संविदा पर नियुक्त मलेरिया-पर्वेण हेल्थ वर्कर (एफएचडब्ल्यू) को लेकर कहा कि करीब तीन साल काम करने मात्र से संविदा कर्मचारियों को सेवा में स्थायी या नियमित नियुक्ति का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता।

कोर्ट ने नियमित नियुक्ति की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। मामले में वर्ष 2012-13 में एनआरएचएम के तहत नियुक्त कर्मचारियों ने नियमितीकरण की मांग की थी।