केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों की नजर अब 8वें वेतन आयोग की अगली अहम बैठक पर है. आयोग की 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में बैठक होने वाली है. इसके बाद 22 और 23 अक्टूबर को मुंबई में भी बैठक प्रस्तावित है. यानी आयोग की कवायद अभी जारी है, लेकिन कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि रिपोर्ट आखिर कब आएगी और नई वेतन दरों का फायदा कब से मिलेगा.
दरअसल, 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. सरकार ने 3 नवंबर 2025 को आयोग के कामकाज और दायरे से जुड़े टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को अधिसूचित किया था. इसके बाद से 18 महीने की समयसीमा शुरू हुई. अब इस समयसीमा के करीब 11 महीने बीत चुके हैं. अगर तय अवधि में रिपोर्ट तैयार नहीं होती है, तो आयोग सरकार से समय बढ़ाने की मांग कर सकता है.
देशभर के शहरों में हो चुकी हैं बैठकें
अब तक देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर कर्मचारी और पेंशनर संगठनों से चर्चा कर चुका है. देहरादून, पुणे, हैदराबाद, श्रीनगर, लद्दाख, लखनऊ, भुवनेश्वर, कोलकाता, जयपुर, चेन्नई, पुडुचेरी और चंडीगढ़ समेत कई जगह बैठकें हो चुकी हैं. दिल्ली में 10 मई और 7 अगस्त को बैठक हुई थी. अब 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु और 22-23 अक्टूबर को मुंबई में बैठक होनी है. इन बैठकों में कर्मचारियों, पेंशनरों और दूसरे संबंधित पक्षों की मांगों और सुझावों पर चर्चा की जा रही है.
रिपोर्ट कब आएगी? अलग-अलग राय
रिपोर्ट की तारीख को लेकर अभी अलग-अलग कर्मचारी संगठनों की राय सामने आ रही है. ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्पलाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल के मुताबिक, अगर नवंबर तक सभी जरूरी बैठकें पूरी हो जाती हैं, तो रिपोर्ट फरवरी या मार्च में सरकार को सौंपी जा सकती है.
वहीं, ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन के महासचिव सी. श्रीकुमार का कहना है कि आयोग को मई 2027 तक का समय मिला है. उनके मुताबिक रिपोर्ट 18 महीने की तय अवधि के भीतर आ सकती है. रिपोर्ट मिलने के बाद सिफारिशों को लागू करने में सरकार को 3 से 4 महीने लग सकते हैं.
दूसरी तरफ, कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स के अध्यक्ष एसबी यादव का अनुमान है कि रिपोर्ट मई 2027 में भी आ सकती है. उनका कहना है कि सरकार सिफारिशों की समीक्षा के लिए मंत्रियों का समूह बनाने और उसे लागू करने की प्रक्रिया में 4 से 6 महीने और ले सकती है.
इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन के महासचिव केवी कामेश का कहना है कि 2027 के आखिर तक इसका असर दिखाई दे सकता है. उनके मुताबिक नई वेतन दरें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होंगी. वहीं, भारत पेंशनर्स समाज के अविनाश राजपूत का मानना है कि पूरी प्रक्रिया 2029 या 2030 तक भी जा सकती है.
आयोग की रिपोर्ट आने के बाद क्या होगा?
वेतन आयोग सीधे नई सैलरी लागू नहीं करता. पहले आयोग अलग-अलग पक्षों से बातचीत और सुझाव लेने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करता है. इसके बाद रिपोर्ट केंद्र सरकार के स्तर पर जाती है. सरकार सिफारिशों की समीक्षा के लिए मंत्रियों का समूह बना सकती है और उसमें बदलाव या संशोधन पर भी विचार हो सकता है. इसके बाद सरकार सिफारिशों को मंजूरी देकर अधिसूचित करती है. अगर नई वेतन दरें पिछली तारीख से प्रभावी की जाती हैं, तो उस अवधि का बकाया यानी एरियर कर्मचारियों और पेंशनरों को मिल सकता है.
पहले के वेतन आयोगों में कितना समय लगा
पुराने वेतन आयोगों को देखें तो रिपोर्ट तैयार होने में अलग-अलग समय लगा है. 7वां वेतन आयोग फरवरी 2014 में गठित हुआ था और उसने नवंबर 2015 में रिपोर्ट सौंपी थी. 6वें वेतन आयोग का गठन अक्टूबर 2006 में हुआ और मार्च 2008 में रिपोर्ट दी गई थी. इससे पहले भी वेतन आयोगों की प्रक्रिया कई वर्षों तक चली है. इसलिए 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट की तारीख को लेकर अभी किसी एक समयसीमा को अंतिम मानना सही नहीं होगा.
कर्मचारियों के लिए अभी क्या समझना जरूरी
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट की तारीख तय नहीं है. फरवरी-मार्च 2027 से लेकर मई 2027 तक की अलग-अलग संभावनाएं कर्मचारी संगठनों की तरफ से बताई जा रही हैं. इसी तरह रिपोर्ट आने के बाद इसे लागू करने में 3-4 महीने से लेकर उससे ज्यादा समय लगने की राय भी सामने आई है. नई वेतन दरों को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी करने की बात भी कर्मचारी पक्ष की ओर से कही जा रही है. अगर सरकार इन्हें पिछली तारीख से लागू करती है, तो बीच की अवधि का एरियर मिलने का रास्ता बन सकता है. हालांकि, अंतिम फैसला सरकार की ओर से सिफारिशों पर कार्रवाई और अधिसूचना जारी होने के बाद ही साफ होगा.
