पशुधन प्रसार अधिकारी की भर्ती में ओएमआर शीट के मूल्यांकन व मेरिट सूची तैयार करने में अनियमितताओं के आरोप भी थे। शासन ने अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के दृष्टिगत 2017 में मामले की जांच एसआईटी (अब ईओडब्ल्यू में विलीन) को सौंपी थी। जांच में सामने आया कि मंडलीय चयन समितियों के अधिकारों के विपरीत ओएमआर शीट का केंद्रीयकृत मूल्यांकन कराने के लिए फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट, रायबरेली को नामित किया गया था।
आरोप हैं कि भर्ती प्रक्रिया में नियमावली के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया और विपरीत निर्णय लेकर ओएमआर शीट में छेड़छाड़ की गई और अपात्र अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर 2019 में थाना एसआईटी पर मामले में पशुधन विभाग के तत्कालीन निदेशक रुद्र प्रताप सिंह समेत छह आरोपितों के विरुद्ध धोखाधड़ी, षड्यंत्र, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
25 आरोपितों के विरुद्ध दाखिल हो चुकी चार्जशीट : ईओडब्ल्यू के अनुसार मामले में छह नामजद आरोपितों के अलावा तत्कालीन प्रमुख सचिव व मंत्री समेत 22 आरोपितों की भूमिका विवेचना में सामने आई थी। जांच एजेंसी मामले में कुल 28 आरोपितों में से 25 आरोपितों के विरुद्ध कोर्ट में विभिन्न तिथियों में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। जल्द आरोपी पूर्व आईएएस अधिकारी योगेश कुमार के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा।
जांच एजेंसी ने शासन से अभियोजन स्वीकृति मिलने पर योगेश कुमार के विरुद्ध शिकंजा कसा है। वह भर्ती के दौरान प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थे।
मंडल के बजाए मुख्यालय से भर्ती की दी थी अनुमति
जांच में सामने आया है कि तत्कालीन मुख्य सचिव व मंत्री ने नियमावली के विरुद्ध मंडल स्तर के बजाए सीधे मुख्यालय से भर्ती कराने का निर्णय किया था और इसके अनुमोदन की फाइल पर दोनों ने हस्ताक्षर किए थे।
भर्ती के बाद रिटायर हुए थे योगेश कुमार
पशुधन प्रसार अधिकारी की भर्ती प्रक्रिया जून 2014 में पूरी हुई थी और तत्कालीन मुख्य सचिव योगेश कुमार 30 जून 2014 को सेवानिवृत्त हुए थे।

