15 October 2026

पंचायत चुनाव तीन माह में कराएं:कोर्ट

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि प्रदेश में ग्राम पंचायतों के चुनाव तीन महीने के भीतर संपन्न कराए जाएं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह चुनाव मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत ही कराए जाएंगे, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित 27 प्रतिशत आरक्षण भी शामिल रहेगा।



यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने दशरथ यादव व अन्य कई की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद बुधवार को दिया। देर रात हाईकोर्ट की वेबसाइट पर इसका आदेश अपलोड किया गया। कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को तत्काल चुनावी प्रक्रिया शुरू करने और इस निर्णय की तिथि से तीन महीने के भीतर चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार को आयोग को आवश्यक कर्मचारी, बजट और सुरक्षा बल उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है।

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समर्पित आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल: हाईकोर्ट ने 18 मई 2026 को गठित सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह की अध्यक्षता वाले समर्पित पिछड़ा वर्ग आसमर्पित आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने आगरा जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि 25 लाख से अधिक की ग्रामीण आबादी में से मात्र 175 लोग बैठक में आए और केवल 29 लोगों ने फॉर्म भरे। कोर्ट ने कहा कि सामान्य रायशुमारी या फॉर्म भरवाना वास्तविक राजनीतिक पिछड़ेपन का वैज्ञानिक पैमाना नहीं हो सकता। कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया कि अपने वैज्ञानिक मानकों और टिप्पणियों के आधार पर जांच जारी रखे, जिसे पूरा होने पर भविष्य के चुनावों के लिए वैधानिक संशोधनों के जरिए लागू किया जा सकता है लेकिन इसके लिए वर्तमान चुनाव नहीं रोके जाएंगे।


निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक बनाना वैध




हाईकोर्ट ने 25 मई 2026 के उस सरकारी आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया, जिसके तहत कार्यकाल समाप्त होने पर निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया था। कोर्ट ने माना कि यह एक अस्थायी व्यवस्था है और स्थानीय ग्रामीणों की सुविधा के लिहाज से यह निर्णय अनुचित नहीं है।


समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग अपना काम जारी रखेगा


कोर्ट ने समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग को निर्देश दिया कि वह ओबीसी वर्ग के सामाजिक-आर्थिक व राजनीतिक पिछड़ेपन के आंकड़ों का संकलन और जांच जारी रखे। आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार भविष्य के चुनावों के लिए आरक्षण व्यवस्था में आवश्यक वैधानिक या विधायी संशोधन कर सकती है।


सर्वे के नाम पर चुनाव टालना असंवैधानिक


कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई के तहत 5 साल का कार्यकाल समाप्त होने पर समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। समर्पित आयोग द्वारा ट्रिपल टेस्ट के लिए एम्पिरिकल डेटा (आंकड़े) जुटाने की लंबी प्रक्रिया के नाम पर चुनावों को अनिश्चितकाल के लिए नहीं टाला जा सकता।