नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि इंटरनेट तक पहुंच और उसका उपयोग हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। हमारे बच्चों को भी यह अधिकार प्राप्त हैं, लिहाजा उन्हें इंटरनेट से वंचित करना गलत होगा।
जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 15 अक्तूबर को ये टिप्पणियां कीं, जिनकी जानकारी अब सार्वजनिक हुई हैं। कोर्ट सोशल मीडिया मंचों और अन्य ऑनलाइन सेवाओं में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (सीएसईएएम) का पता लगाने और हटाने के तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दे रही थी। कोर्ट ने कहा, ‘हमें यह कहने में संकोच नहीं है कि संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत इंटरनेट तक पहुंच हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। हमारे बच्चों को भी, चाहे उनकी उम्र कुछ भी हो, यही अधिकार प्राप्त हैं। इन अधिकारों से उन्हें वंचित करना बेतुका होगा।’
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कोर्ट ने केंद्र को नेशनल डेटाबेस बनाने की प्रगति का हलफनामा पेश करने के लिए कहा है, जिसकी अगली सुनवाई 10 दिसंबर तय की गई है।
अनियंत्रित मंचों का खतरा: कोर्ट ने कहा कि बच्चों के लिए इंटरनेट पर कानूनी रोक का अर्थ यह नहीं कि वे इसका प्रयोग बंद कर देते हैं। वे माता-पिता की जानकारी के बिना भी उपयोग जारी रखते हैं। वे ऐसे मंचों का रुख कर लेते हैं, जो अनियंत्रित होते हैं।
पांच अहम सुझाव
● सुरक्षा: बच्चों के ऑनलाइन खातों की कई चरणों पर सुरक्षा हो
● सहमति : बच्चों के खातों के लिए माता-पिता की सहमति महत्वपूर्ण
● सीमित संपर्क : बच्चों को अनजान द्वारा संदेश, संपर्क सीमित हों
● निगरानी : बच्चों को दिखने वाले ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी हो
● चाइल्ड मोड : बच्चों के खातों के लिए ‘चाइल्ड मोड’ का विकल्प दें
कंपनियों से कहा
● सीएसईएएम और प्रतिबंधित कंटेंट हटाने के दो घंटे में पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल को रिपोर्ट दें
● वेबसाइट और ऐप पर शिकायत के लिए समर्पित अधिकारी की जानकारी उपलब्ध करानी होगी
● बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों में शिकायत के लिए अलग से विकल्प उपलब्ध कराना होगा, 24 घंटे में प्राप्ति की पुष्टि अनिवार्य
केंद्र को ये निर्देश दिए
● सोशल मीडिया मंचों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया बनाएं
● सीएसईएएम का पता लगाने के लिए तकनीकों का प्रयोग करें
● जिम्मेदारी न निभाने वाले मध्यस्थों पर आर्थिक जुर्माने का ढांचा बने
● बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट होस्ट, अपलोड या प्रसारित कर की जाने वाली कमाई को जब्त किया जाए
केंद्र सरकार को देशव्यापी डेटाबेस तैयार करना होगा
अदालत ने बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री की पहचान करने और उसे हटाने के लिए केंद्र सरकार को देशव्यापी डेटाबेस तैयार करने का निर्देश भी दिया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के डेटाबेस से ऐसी सामग्री की पहचान और उस पर कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।

