18 October 2026

जनगणना ड्यूटी में अब प्राइवेट /निजी स्कूलों के शिक्षक भी होंगे शामिल, केंद्र ने बदले नियम

 


देश में हर दस साल में जनगणना कराई जाती है। वर्ष 2021 में भी जनगणना होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।

केंद्र सरकार ने जनगणना नियम 1990 में संशोधन किया है। इसके बाद राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश जनगणना के काम में सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी प्रगणक (Enumerator) नियुक्त कर सकेंगे। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

भारत के महापंजीयक (आरजीआई) मृत्युंजय कुमार नारायण की ओर से जारी राजपत्र अधिसूचना के जरिए इन नियमों में बदलाव किया गया है। पहले से लागू नियमों के तहत राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को शिक्षकों, लिपिकों, अधिकारियों और अन्य लोगों को प्रगणक नियुक्त करने का अधिकार था। अब संशोधित नियमों में सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।


जनगणना करने के लिए तीन तरह के लोगों को रखा जाता है

शुक्रवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक जनगणना अधिकारी के रूप में काम करने और प्रगणक की जिम्मेदारी निभाने के लिए तीन तरह के लोगों को नियुक्त किया जा सकता है। इनमें सरकारी, स्थानीय निकायों, सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त निजी संस्थाओं, सोसायटी और न्यासों के किसी भी शैक्षणिक संस्थान के शिक्षक शामिल हैं।




दूसरे वर्ग में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय या किसी प्रतिष्ठान के लिपिक और अधिकारी आते हैं। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, वैधानिक निकाय, बैंक, कंपनियां, संस्थान, सोसायटी और न्यास भी शामिल हैं। तीसरे वर्ग में ऐसे लोग हैं, जिन्हें राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन इस काम के लिए उपयुक्त मानता है।


हरियाणा के निजी स्कूलों की याचिका के बीच हुआ बदलाव

जनगणना नियमों में यह संशोधन पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चल रहे एक मामले की पृष्ठभूमि में किया गया है। हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस ने अदालत में याचिका दायर कर गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना के काम में लगाने के फैसले को चुनौती दी थी।



न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने आठ अक्टूबर को एक आदेश जारी कर हरियाणा सरकार के उन दो पत्रों पर रोक लगा दी थी, जिनके जरिए जनगणना ड्यूटी के लिए उपलब्ध शिक्षकों का ब्योरा मांगा गया था। इस मामले की अगली सुनवाई अब 29 अप्रैल, 2027 को होगी।


याचिकाकर्ता का कहना था कि जनगणना अधिनियम 1948 और उसके तहत बनाए गए नियमों में ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, जिसके आधार पर सरकार गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को प्रगणक या पर्यवेक्षक नियुक्त करने के लिए उनकी सेवाएं ले सके।


याचिका में यह भी दलील दी गई थी कि जनगणना अधिनियम की धारा 4ए में जनगणना से जुड़े कामों के लिए स्थानीय निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं लेने का विशेष प्रावधान है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल और उनके कर्मचारी स्थानीय निकायों की परिभाषा या दायरे में नहीं आते। इसी आधार पर निजी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी में लगाने के फैसले को चुनौती दी गई थी।



दो चरणों में होगी वर्ष 2027 की जनगणना

वर्ष 2027 की जनगणना स्वतंत्रता के बाद देश की आठवीं जनगणना होगी। यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में घरों की सूची तैयार करने और मकानों की गणना का काम होगा। दूसरे चरण में देश की आबादी की गणना की जाएगी।



देश में हर दस साल में जनगणना कराई जाती है। वर्ष 2021 में भी जनगणना होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब यह प्रक्रिया वर्ष 2027 में कराई जा रही है।