18 October 2026

फर्जी शिक्षकों की जांच में बार-बार सुस्ती, अब सभी नियुक्तियों की होगी पड़ताल; दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी

 

फर्जी शिक्षकों की जांच में बार-बार सुस्ती, अब सभी नियुक्तियों की होगी पड़ताल; दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी

प्रयागराज, 18 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों की पहचान करने के लिए जांच प्रक्रिया एक बार फिर तेज करने की तैयारी है। दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के अनुसार, अब सभी नियुक्तियों की पड़ताल किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। पहले भी कई बार जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए, लेकिन सत्यापन प्रक्रिया में देरी और विभागीय स्तर पर सुस्ती के कारण कई मामले लंबे समय तक लंबित रहे।

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2018 से शुरू हुई जांच, कई स्तरों पर सत्यापन

खबर के मुताबिक, फर्जी नियुक्तियों की जांच के लिए वर्ष 2018 और वर्ष 2011 से जुड़ी भर्तियों के दस्तावेजों की पड़ताल का मुद्दा सामने आया। संबंधित मामलों में शैक्षिक प्रमाणपत्रों, नियुक्ति अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों के सत्यापन की आवश्यकता बताई गई है।

जांच के दौरान कई जिलों में नियुक्तियों से संबंधित रिकॉर्ड और प्रमाणपत्रों के सत्यापन में देरी की बात भी सामने आई है।

STF और पुलिस की जांच में भी सामने आए मामले

समाचार रिपोर्ट में STF, पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से की गई जांच का उल्लेख है। कुछ मामलों में संदिग्ध दस्तावेजों और नियुक्तियों की जांच की गई, जबकि कई प्रकरणों में सत्यापन की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में फर्जी प्रमाणपत्रों से संबंधित मामलों की जांच और कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे थे।

कई जिलों में नियुक्तियों के दस्तावेजों की पड़ताल

खबर में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत शिक्षकों की नियुक्तियों और प्रमाणपत्रों की जांच का उल्लेख किया गया है। इसमें एसटीएफ की कार्रवाई तथा विश्वविद्यालयों से शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराने जैसे बिंदु शामिल हैं।

दस्तावेजों की जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आने पर संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

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दोषी पाए जाने पर हो सकती है कार्रवाई

फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों या गलत तथ्यों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करने की पुष्टि होने पर संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसमें सेवा संबंधी कार्रवाई के साथ अन्य कानूनी कदम भी शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, किसी शिक्षक के विरुद्ध अंतिम कार्रवाई से पहले संबंधित अभिलेखों का सत्यापन, तथ्यों की जांच और निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

सभी नियुक्तियों की जांच पर नजर

इस खबर का प्रमुख बिंदु यह है कि फर्जी नियुक्तियों से जुड़े मामलों में जांच की गति बढ़ाने और नियुक्ति अभिलेखों की पड़ताल करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस दिशा में क्या आधिकारिक आदेश जारी करता है और लंबित मामलों में कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।