दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट का इंटर-डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर पर फैसला
➡️परिवार से दूर रहना आम समस्या- सुप्रीम कोर्ट
➡️‘इस आधार पर इंटर-डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर अधिकार नहीं’
➡️यूपी के बेसिक शिक्षा परिषद की शिक्षिका की याचिका
➡️‘परिवार से दूर रहना कर्मचारियों की सार्वभौमिक समस्या’
➡️केवल इस आधार पर इंटर-डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर नहीं
➡️जज जे.बी. पारदीवाला, जज के. विनोद चंद्रन की पीठ का फैसला
➡️इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ बेंच का अवमानना आदेश रद्द किया
➡️शिक्षा व्यवस्था मुख्य रूप से छात्रों के लिए है
➡️न कि शिक्षकों का करियर आगे बढ़ाने- सुप्रीम कोर्ट
📋 *क्या था पूरा मामला?*• उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में तैनात एक प्राथमिक शिक्षिका ने अपने पति और ससुराल वालों के पास लखनऊ ट्रांसफर करने की मांग की थी, क्योंकि वह बहराइच में अपनी ढाई साल की बेटी के साथ अकेली रह रही थीं।
• विभाग ने उनकी इस अर्जी को खारिज कर दिया था, क्योंकि इंटर-डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर के लिए बहराइच का न्यूनतम कट-ऑफ 22 अंक था, जबकि शिक्षिका को केवल 12 अंक मिले थे।
• इसके अलावा, जिस स्कूल में वह तैनात थीं, वहाँ 137 छात्रों पर केवल 2 शिक्षक थे। राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट के तहत वहाँ 5 शिक्षकों की जरूरत थी। कोर्ट ने पाया कि ऐसे में एक और शिक्षक को हटा देने से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो जाती, इसलिए विभाग द्वारा ट्रांसफर रोकने का फैसला बिल्कुल सही था।

