फेस्टिव सीजन में 'भारी छूट' के नाम पर साइबर ठगों का जाल: नामी कंपनियों के फर्जी क्लोन बनाकर खाली कर रहे बैंक खाते
संभल/गाजियाबाद: त्योहारों के सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग पर मिलने वाली भारी छूट ग्राहकों की जेब पर भारी पड़ रही है। साइबर जालसाज अब अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों के नाम और लोगो का दुरुपयोग कर फर्जी वेबसाइट्स के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं।
90% डिस्काउंट का लालच देकर फंसा रहे जालसाज
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स—जैसे इंस्टाग्राम और फेसबुक—पर 80 से 90 प्रतिशत तक की छूट वाले भ्रामक विज्ञापन चलाए जा रहे हैं।
- संभल में एक ग्राहक को इंस्टाग्राम पर अमेजन के लोगो से मिलते-जुलते नाम वाली साइट पर नया आईफोन महज ₹5,099 में ऑफर किया गया।
- एक अन्य मामले में फेसबुक पर छह हजार रुपये का गैस चूल्हा ₹599 में बेचने का झांसा दिया गया।
दोनों मामलों में लिंक खोलने पर आधिकारिक ऐप या वेबसाइट के बजाय क्लोन वेबपेज खुले, जहां केवल ऑनलाइन भुगतान का विकल्प दिया गया था।
इंश्योरेंस प्रीमियम छूट के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा गया
इधर गाजियाबाद में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो गूगल विज्ञापनों के जरिए ऑनलाइन बीमा पॉलिसी के प्रीमियम पर 30 से 50 फीसदी छूट का लालच देकर ठगी करता था। डीसीपी बलवंत कुमार चौधरी के अनुसार, एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य सरगना दीपक खन्ना उर्फ डीजे अभी फरार है। पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और चेकबुक बरामद किए हैं।
साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह: इन 4 बातों का रखें ध्यान
साइबर थाना निरीक्षक पुष्पेंद्र सिंह चौहान के अनुसार, किसी भी विज्ञापन पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय ये सावधानियां बरतें:
- सीधे लिंक पर क्लिक न करें: सोशल मीडिया पर दिखने वाले विज्ञापनों के लिंक से जाने के बजाय संबंधित कंपनी की आधिकारिक ऐप या वेबसाइट पर जाकर ऑफर क्रॉस-चेक करें।
- यूआरएल (URL) और डोमेन की जांच: भुगतान करने से पहले वेबसाइट के वेब एड्रेस को ध्यान से पढ़ें; फर्जी साइट्स के डोमेन नाम में अक्सर स्पेलिंग की मामूली गलतियां होती हैं।
- सीओडी (Cash on Delivery) का अभाव: यदि किसी साइट पर कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प बंद हो और केवल तुरंत ऑनलाइन भुगतान का दबाव हो, तो सतर्क हो जाएं।
- अविश्वसनीय कीमतें: बाजार मूल्य से 80-90% कम कीमत पर मिलने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स या महंगे उत्पाद लगभग हमेशा फर्जीवाड़े का हिस्सा होते हैं।

