। यूपी के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में नए प्रवेश पाने वाले छात्रों को अभी भी मुफ्त स्कूली ड्रेस, जूते-मोजे का इंतजार है। ज्यादातर छात्र एक जुलाई व उससे बाद प्रवेश लेने वाले हैं। अभी तक इन छात्रों के अभिभावकों के बैंक खाते में 1200 रुपये की धनराशि नहीं पहुंची है। ऐसे छात्रों की संख्या करीब आठ लाख से अधिक है।
परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को मुफ्त स्कूली ड्रेस, जूता-मोजा व बैग इत्यादि खरीदने के लिए डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के बैंक खाते में धनराशि भेजी जाती है। जैसे-जैसे छात्रों व उनके अभिभावकों का आधार कार्ड से लिंक बैंक खाते का सत्यापन पूरा होता है, उनका ब्योरा ऑनलाइन कर दिया जाता है। जिन करीब आठ लाख छात्रों को मुफ्त ड्रेस, जूता-मोजा इत्यादि नहीं मिला है, उनकें ज्यादातर एक जुलाई से 30 सितंबर तक प्रवेश पाने वाले छात्र हैं। वहीं कुछ छात्र पुराने भी हैं, जिनके अभिभावकों को अभी तक यह धनराशि नहीं मिली है। चरणबद्ध ढंग से परिषदीय स्कूलों के छात्रों के अभिभावकों के बैंक खाते में धनराशि भेजी जा रही है। पहले चरण में 1.10 करोड़ छात्रों के अभिभावकों के बैंक खाते में 1200-1200 रुपये भेजे गए थे। उसके बाद दूसरे चरण में लगभग 10 लाख छात्रों को मुफ्त स्कूली ड्रेस व जूते-मोजे खरीदने को धन भेजा गया।
रकम मिलने के बावजूद नहीं खरीदी ड्रेस
स्कूलों में तमाम छात्र ऐसे भी हैं, जिनके अभिभावकों के बैंक खाते में धनराशि भेजी जा चुकी है फिर भी वह ड्रेस में नहीं आ रहे। अब शिक्षक ऐसे अभिभावकों को घर पर जाकर समझा रहे हैं कि वह जल्दी ड्रेस खरीदें। पोर्टल पर छात्रों की स्कूली ड्रेस में फोटो अपलोड कराई गई तो बड़ी संख्या में छात्र ऐसे सामने आए जिनके अभिभावकों ने रकम मिलने के बावजूद अभी ड्रेस नहीं खरीदी। ऐसे छात्र बिना ड्रेस के आ रहे हैं।

