20 October 2026

Prashast 2.0 Update 2026: 9.20 लाख शिक्षक जुड़े, 8.15 लाख ने पूरी की वीडियो ट्रेनिंग

 

Prashast 2.0: प्रदेश के 9.20 लाख शिक्षक जुड़े, 8.15 लाख ने देखीं सभी प्रशिक्षण वीडियो

UP School News 2026: उत्तर प्रदेश में समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्राशस्त 2.0 (Prashast 2.0) के माध्यम से शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान करना और उनकी शैक्षिक जरूरतों को समझकर बेहतर शिक्षण अवसर उपलब्ध कराना है।

लखनऊ। प्रदेश में विद्यालयी शिक्षा को तकनीक, संवेदनशीलता और समावेशन से जोड़ने के लिए प्राशस्त 2.0 अभियान चलाया जा रहा है। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 9.20 लाख शिक्षक प्राशस्त 2.0 पर ऑनलाइन जुड़ चुके हैं, जबकि 8.15 लाख शिक्षकों ने प्रशिक्षण से संबंधित सभी वीडियो देख लिए हैं।

प्राशस्त 2.0 से शिक्षकों को क्या मिलेगा?

प्राशस्त 2.0 के तहत शिक्षकों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, उनकी शैक्षिक जरूरतों को समझने और समावेशी शिक्षा से संबंधित डिजिटल प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इस पहल के प्रमुख उद्देश्य हैं:

  • विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान करना।

  • बच्चों की व्यक्तिगत शैक्षिक जरूरतों को समझना।

  • शिक्षकों को समावेशी शिक्षा के प्रति जागरूक बनाना।

  • दिव्यांग बच्चों को बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना।

  • विद्यालयों में समान अवसर और सहयोगपूर्ण माहौल विकसित करना।

जिलों में डिजिटल प्रशिक्षण से शिक्षक क्षमता विकास पर जोर

रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न जिलों में शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण से जोड़ने का कार्य किया गया है। इसमें रामपुर, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है।

समाचार में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, प्राशस्त 2.0 पर ऑनलाइन होने वाले शिक्षकों का प्रतिशत रामपुर में 90.5%, पीलीभीत में 88.7% और लखीमपुर खीरी में 86.3% बताया गया है।

वहीं, प्रशिक्षण के सभी वीडियो देखने वाले शिक्षकों का प्रतिशत रामपुर में 88.3%, पीलीभीत में 84.6% और लखीमपुर खीरी में 82.5% बताया गया है।

समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाने की पहल

महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के अनुसार, डिजिटल प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षिक जरूरतों को समझने से संबंधित जानकारी दी जा रही है।

इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों की विभिन्न आवश्यकताओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनाना और उन्हें आवश्यक शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए तैयार करना है।

शिक्षकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है प्राशस्त 2.0?

प्राशस्त 2.0 शिक्षकों को समावेशी शिक्षा की अवधारणा को व्यावहारिक रूप से समझने में मदद करता है। इससे विद्यालयों में ऐसे बच्चों की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझने और उनके अनुकूल शिक्षण गतिविधियां तैयार करने में सहायता मिल सकती है।

निष्कर्ष: प्राशस्त 2.0 के माध्यम से उत्तर प्रदेश में डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 9.20 लाख शिक्षक इससे जुड़ चुके हैं और 8.15 लाख शिक्षक सभी प्रशिक्षण वीडियो देख चुके हैं। यह पहल समावेशी शिक्षा को मजबूत करने और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को बेहतर शैक्षिक अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

स्रोत: अमर उजाला में प्रकाशित समाचार रिपोर्ट।