05 October 2026

बाल पुरस्कार के लिए चयन का कोई तय पैमाना नहीं: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय



नई दिल्ली, पेट्र: बच्चों के सपनों और उनकी असाधारण उपलब्धियों को सम्मानित करने वाले प्रतिष्ठित 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' की चयन प्रक्रिया को लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के समक्ष बड़ा खुलासा किया है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए कोई निश्चित न्यूनतम अंक, स्कोर, रैंकिंग या चयन का कोई तय पैमाना नहीं है.


मंत्रालय के अनुसार, पुरस्कार के लिए प्राप्त योग्य नामांकनों का महिला-बाल विकास मंत्रालय ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को बताया, समग्र मूल्यांकन के आधार पर ही चयन.

चयन प्रक्रिया और आरटीआई से जुड़े मुख्य बिंदु:

  • चयन किसी तय फॉर्मूले के बजाय पूरी तरह से 'समग्र मूल्यांकन' (होलिस्टिक असेसमेंट) और एक प्रतिस्पर्धी माहौल में बच्चों की असाधारण उपलब्धियों के आधार पर किया जाता है.

  • केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने पारदर्शिता पर जोर देते हुए मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह वर्ष 2023, 2024 और 2025 के दौरान मिले, शॉर्टलिस्ट किए गए और चुने गए नामांकनों के कुल आंकड़े चार सप्ताह के भीतर आवेदक को उपलब्ध कराए.

  • यह पूरा मामला एक आरटीआई आवेदन से जुड़ा है, जिसमें चयन प्रक्रिया, स्कोरिंग पद्धति और पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों की मांग की गई थी.

  • शुरुआत में मंत्रालय ने इन जानकारियों को गोपनीय बताते हुए देने से इनकार कर दिया था. हालांकि, सूचना आयुक्त पीआर रमेश ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत विवरणों को छोड़कर कुल सांख्यिकी आंकड़े सार्वजनिक किए जा सकते हैं.

  • सीआईसी ने इस प्रसंग में सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला दिया और आवेदक द्वारा दायर चार नामांकनों की स्थिति पर स्पष्ट जवाब न मिलने पर नाखुशी जताई.

  • इसने निर्देश दिया कि यदि कोई संवेदनशील जानकारी है, तो उसे आरटीआई अधिनियम की धारा 10 के तहत अलग करके बाकी तथ्यात्मक जानकारी निश्चित समय-सीमा के भीतर साझा की जाए. यह फैसला उन नन्हें होनहारों के लिए पारदर्शिता की एक नई किरण लेकर आया है जो देश का नाम रोशन कर रहे हैं.