NIOS Bridge Course 2026: उत्तर प्रदेश में NIOS ब्रिजकोर्स कर रहे शिक्षकों के बीच असाइनमेंट, स्कूल एक्टिविटी और लेसन प्लान तैयार करने को लेकर कई तरह के सवाल सामने आ रहे हैं। कोई शिक्षक असाइनमेंट और लेसन प्लान लिखने को लेकर परेशान है, तो कोई इस उलझन में है कि इन्हें प्रिंट कराना सही रहेगा या 5E कॉन्सेप्ट के आधार पर तैयार करना होगा।
इसी बीच टीम के साथी संगम शुक्ला ने शिक्षकों को सलाह देते हुए कहा है कि वे अनावश्यक तनाव न लें और लिखित परीक्षा की तैयारी पर विशेष ध्यान दें।
असाइनमेंट और लेसन प्लान लिखें या प्रिंट कराएं?
साझा की गई जानकारी के अनुसार, NIOS के ओरिएंटेशन प्रोग्राम में बताया गया था कि तकनीक के इस दौर में शिक्षक असाइनमेंट और लेसन प्लान लिखकर भी तैयार कर सकते हैं और प्रिंट आउट भी करा सकते हैं।
इसलिए शिक्षकों को असाइनमेंट और लेसन प्लान को लेकर ज्यादा परेशान होने के बजाय निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार अपनी तैयारी पूरी करनी चाहिए। हालांकि, अंतिम रूप से वही प्रारूप अपनाएं जो NIOS के आधिकारिक निर्देशों और संबंधित मूल्यांकन व्यवस्था के अनुरूप हो।
250 अंकों के आंतरिक मूल्यांकन पर क्या कहा गया?
संगम शुक्ला द्वारा साझा किए गए संदेश में असाइनमेंट, स्कूल एक्टिविटी और लेसन प्लान से जुड़े 250 अंकों के मूल्यांकन का उल्लेख किया गया है। उनके अनुसार, इस हिस्से के मूल्यांकन में स्कूल के प्रधानाध्यापक या विभाग की ओर से भेजे गए रिसोर्स पर्सन की भूमिका हो सकती है।
उन्होंने शिक्षकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर बेवजह तनाव लेने की जरूरत नहीं है। हालांकि, अंकों के वास्तविक विभाजन और मूल्यांकन के नियमों की पुष्टि NIOS के आधिकारिक दिशा-निर्देशों से करना जरूरी है।
लिखित परीक्षा पर विशेष ध्यान देने की सलाह
संदेश में शिक्षकों को लिखित परीक्षा की तैयारी को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। इसमें न्यूनतम अंक प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ नियमित अध्ययन करने पर जोर दिया गया है।
शिक्षकों को चाहिए कि वे ब्रिजकोर्स के पाठ्यक्रम, अध्ययन सामग्री, महत्वपूर्ण प्रश्नों और निर्धारित परीक्षा पैटर्न के अनुसार अपनी तैयारी करें। असाइनमेंट और लेसन प्लान भी समय पर तथा निर्धारित प्रारूप में पूरे करें, ताकि किसी प्रकार की परेशानी न हो।
ज्यादा अंक लाने से तत्काल प्रमोशन की गारंटी नहीं
साझा संदेश में यह भी कहा गया है कि ब्रिजकोर्स में 90 या 95 प्रतिशत अंक लाने का अर्थ यह नहीं है कि तत्काल प्रमोशन मिल जाएगा या विभागीय पद में बदलाव हो जाएगा। इसलिए शिक्षकों को केवल अधिक अंक प्राप्त करने के दबाव में मानसिक तनाव नहीं लेना चाहिए।
इसका उद्देश्य शिक्षकों को यह समझाना है कि वे अपनी तैयारी संतुलित तरीके से करें और परीक्षा के साथ-साथ असाइनमेंट, लेसन प्लान तथा स्कूल एक्टिविटी से संबंधित कार्य भी नियमानुसार पूरा करें।
शिक्षकों के लिए क्या है जरूरी सलाह?
- NIOS के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार असाइनमेंट तैयार करें।
- लेसन प्लान में निर्धारित प्रारूप और आवश्यक शिक्षण बिंदुओं का ध्यान रखें।
- प्रिंट आउट या हस्तलिखित कार्य के संबंध में आधिकारिक निर्देशों की पुष्टि करें।
- लिखित परीक्षा की तैयारी नियमित रूप से करें।
- सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट अंकों और मूल्यांकन संबंधी दावों पर आंख बंद करके भरोसा न करें।
निष्कर्ष: ब्रिजकोर्स कर रहे शिक्षकों के लिए सबसे बेहतर तरीका यही है कि वे असाइनमेंट, लेसन प्लान और स्कूल एक्टिविटी को समय से पूरा करें तथा लिखित परीक्षा की तैयारी भी पूरी गंभीरता से करें। बिना वजह तनाव लेने के बजाय आधिकारिक निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ना अधिक उपयोगी रहेगा।
नोट: यह खबर टीम के साथी संगम शुक्ला द्वारा साझा किए गए सुझावों पर आधारित है। अंकों के विभाजन, न्यूनतम उत्तीर्णांक और मूल्यांकन संबंधी दावों को NIOS के आधिकारिक दिशा-निर्देशों से सत्यापित किया जाना चाहिए।
