18 October 2026

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: इंटरनेट बच्चों का मौलिक अधिकार, CSAM हटाने के लिए बनेगा राष्ट्रीय डेटाबेस

 

इंटरनेट बच्चों का मौलिक अधिकार, पूर्ण प्रतिबंध संभव नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट तक पहुंच और उसका इस्तेमाल करना हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। बच्चों को भी इससे वंचित नहीं किया जा सकता। हालांकि, बच्चों को ऑनलाइन बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री और अन्य डिजिटल खतरों से बचाने के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।


बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री हटाने के लिए बनेगा डेटाबेस

अदालत ने केंद्र सरकार को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (CSAM) की पहचान करने तथा उसे हटाने के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य ऐसी आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार पर रोक लगाना और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करना है।

इंटरनेट पर पूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि ऑनलाइन खतरों से बच्चों को बचाने के नाम पर इंटरनेट के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाना उचित नहीं होगा। इंटरनेट बच्चों के लिए शिक्षा, जानकारी हासिल करने, विचार व्यक्त करने और रचनात्मक गतिविधियों का महत्वपूर्ण माध्यम है।

अदालत के अनुसार, डिजिटल दुनिया से बच्चों को पूरी तरह दूर करने के बजाय उनकी उम्र के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था और प्रभावी निगरानी के उपाय अपनाए जाने चाहिए।

अभिभावकों की निगरानी और उम्र के अनुसार प्रतिबंध जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को ऑनलाइन नुकसान से बचाने के लिए उम्र के अनुरूप प्रतिबंध, अभिभावकों की निगरानी और अन्य प्रभावी उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है।

स्कूलों में डिजिटल सुरक्षा की शिक्षा पर जोर

अदालत ने स्कूलों के पाठ्यक्रम में डिजिटल सुरक्षा और उम्र के अनुरूप यौन शिक्षा को शामिल करने पर भी जोर दिया। इसके लिए केंद्र सरकार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के विशेषज्ञों से सलाह लेकर पाठ्यक्रम तैयार करने का निर्देश दिया गया।

बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल अधिकारों में संतुलन जरूरी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उद्देश्य बच्चों को बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री से सुरक्षित रखना है, साथ ही इंटरनेट के माध्यम से शिक्षा और जानकारी प्राप्त करने के उनके अधिकार को भी बनाए रखना है।

मुख्य संदेश: बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए इंटरनेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, राष्ट्रीय डेटाबेस, अभिभावकों की निगरानी और डिजिटल सुरक्षा संबंधी शिक्षा जैसे उपायों पर जोर दिया गया है।