UP News: 28 BSA और 13 AD बेसिक से जवाब तलब, निजी स्कूलों की मान्यता के मामलों में शिक्षा विभाग सख्त
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में निजी स्कूलों की मान्यता से जुड़े लंबित मामलों को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग ने सख्ती दिखाई है। अमर उजाला में प्रकाशित खबर के अनुसार, विभाग ने 28 बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) और 13 एडी बेसिक से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही, अधिकारियों को जल्द निर्णय लेकर लंबित मामलों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश के 89 निजी स्कूलों की मान्यता के मामले लंबित
समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के 89 निजी स्कूलों की मान्यता से संबंधित प्रकरण एक से चार महीने तक फाइलों में लंबित हैं। इनमें सबसे अधिक 22 निजी स्कूलों के मामले संभल जिले से संबंधित बताए गए हैं।
लंबित मामलों के कारण स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इसी को देखते हुए विभाग ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
ये भी पढ़ें - UP Teacher News: 2018 से कई बार शुरू हुई फर्जी शिक्षकों की जांच, FIR में देरी से कार्रवाई प्रभावित
ये भी पढ़ें - फर्जी शिक्षकों की जांच में बार-बार सुस्ती, अब सभी नियुक्तियों की होगी पड़ताल; दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी
ये भी पढ़ें - Bagless Day Activities 2026: यूपी के परिषदीय विद्यालयों में हर शनिवार होंगी रोचक गतिविधियां, ₹6,500 का बजट निर्धारित
इन जिलों के मामले लंबित
रिपोर्ट में लखनऊ, सीतापुर, अयोध्या, बाराबंकी, उन्नाव, मथुरा, अलीगढ़, एटा, हाथरस, कासगंज, आजमगढ़, मऊ, बस्ती, संतकबीर नगर, सिद्धार्थनगर, इटावा, महाराजगंज, कानपुर नगर, हरदोई, गौतमबुद्ध नगर, मिर्जापुर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और गाजीपुर सहित कई जिलों में मान्यता संबंधी मामले लंबित होने का उल्लेख है।
BSA और एडी बेसिक से तीन दिन में जवाब मांगा
खबर के अनुसार, बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने संबंधित जिलों के BSA से तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। इसके अलावा, 13 एडी बेसिक से भी आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, आजमगढ़, बस्ती, गोरखपुर, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, मिर्जापुर, मुरादाबाद, सहारनपुर और वाराणसी समेत संबंधित क्षेत्रों के मामलों में जवाब तलब किया गया है।
अब क्या होगा?
विभाग की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण के बाद लंबित मान्यता प्रकरणों की समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से मामलों का निस्तारण करने और अनावश्यक देरी के कारण स्पष्ट करने होंगे।
निजी स्कूल संचालकों के लिए यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि मान्यता संबंधी निर्णय लंबित रहने से स्कूलों के प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

