स्वेच्छाचारी ARP अनेकों बार शिक्षकों साथ कर चुका अभद्रता


उरई (जालौन)। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रेमचंद्र यादव की लचर नीति नीति के परिणाम स्वरूप 16 दिसंबर को कोंच विकासखंड में आयोजित संगोश्ठी परिलक्षित हुआ। उस पर विभागीय अधिकारियों को चिंतन करने की आवश्यकता है। ऐसे स्वेच्छाचारी एआरपी पर तत्काल कार्यवाही अमल में लाये जाने की आवश्यकता है।


विकासखंड कोंच के यशोदा धाम में कार्यशाला का आयोजन किया गया था जिसमें बतौर मुख्य अतिथि उप जिलाधिकारी कोंच एवं आयोजक खंड शिक्षा अधिकारी कोंच थे। कार्यशाला प्रारंभ होने के पूर्व ही एक एआरपी अरविंद स्वर्णकार ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार कर दिया लेकिन चतुर्थ श्रेणी कर्मी चुप रहे और इस घटना से खंड शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया लेकिन उन्होंने भी मौन साध लिया जिसका परिणाम यह हुआ कि मुख्य अतिथि द्वारा जैसे ही कार्यशाला के समापन हुआ उक्त एआरपी अरविंद के मंसूबों में इजाफा होने के कारण उसने पुनः चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग कर दिया तो स्थिति हाथापाई पर पहुंच गयी। जब मामला ज्यादा बढ़ा तो आपस में ही मारापीटी होनी शुरू हो गयी।

अचानक घटित घटनाक्रम का नजारा जैसे ही मौके पर मौजूद शिक्षकों ने देखा तो उन्होंने दोनों के बीच में चल रहे मल्ययुद्ध का हस्तक्षेप कराकर शांत कराया। बाद में दोनों ओर से पुलिस के पास प्रथम सूचना तहरीर देने जा पहुंचे। इस मामले में सबसे गंभीर बात जो निकलकर सामने आयी उसमें एआरपी अरविंद अपनी अभद्र भाषा का प्रयोग कर अनेकों शिक्षकों को भी अपमानित करने का दुस्साहस कर चुका है।
जिसकी समय-2 पर शिकायतें भी शिक्षकों द्वारा बीएसए से की जिसकी जांच भी हुई और शिक्षकों की शिकायत सही पाये जाने के बाद आरोपी पर किसी भी तरह की विभागीय कार्यवाही अमल में नहीं लायी गयी। जबकि इस संबंध शासन के स्पष्ट निर्देष है कि यदि कोई एआरपी, एसआरपी के विरुद्ध किसी भी तरह की अनियमतता या शिकायत सही पायी जाये तो उसको तत्काल पद से मुक्त कर दिया जाये।

इस मामले में यदि बीएसए द्वारा पूर्व के समय में ही एआरपी अरविंद को पद से मुक्त कर दिया गया होता तो इस तरह की षर्मषार होने वाली घटना ही घटित न होती। बताया जाता है कि एआरपी अरविंद की पत्नी भी एआरपी के पद पर कार्यरत है। गजब की बात तो यह है कि दोनों एक ही विद्यालय मंे उपस्थित होते जिसकी शिकायत होने पर बीएसए को आदेष निर्गत करना पड़ा था लेकिन उसका भी अब तक पालन सुनिश्चित नहीं कराया जा सका। यदि भविष्य में इस तरह की पुनः घटना घटित होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा यह तो समय ही बतायेगा।

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