नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में कहा कि निजी स्कूलों को सरकारी स्कूलों के समान सातवें वेतन आयोग के हिसाब से अपने शिक्षकों और अन्य कर्मियों को भुगतान करना होगा।
उच्च न्यायालय ने यह आदेश एक महिला शिक्षक की याचिका पर दिया। हालांकि, उक्त महिला शिक्षक की अब मौत हो चुकी है। अदालत की ओर से उनके कानूनी वारिसों को शिक्षिका के बकाये का भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं। न्यायमूर्ति संजीव नरुला की पीठ ने कहा कि मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, चिकित्सा सुविधाएं, पेंशन ग्रेच्युटी, भविष्य निधि और दूसरे फायदे सरकारी स्कूलों के इसी दर्जे के कर्मचारियों पर लागू होने वाले अधिकारों से कम नहीं होंगे।

