दिल्ली पुलिस की द्वारका सेक्टर-23 थाना टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय डिजिटल सेंधमारी और नकल गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर और डमी कैंडिडेट (इम्पर्सनेशन) के जरिए देशभर में प्रवेश परीक्षाओं में सेंध लगा रहा था।
पुलिस ने छापेमारी के दौरान गिरोह के सरगना समेत 32 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इनमें आईआईटी रुड़की जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के मेधावी छात्र भी शामिल हैं। पुलिस ने धोखाधड़ी, आईटी एक्ट और आपराधिक साजिश की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल डेटा और फॉरेंसिक जांच के बाद इस मामले में कई बड़े नामों और शिक्षा माफियाओं के खुलासे होने की पूरी संभावना है।
गुप्त सूचना पर ‘हैप्पी होम’ में छापेमारी : पुलिस को सूचना मिली थी कि द्वारका सेक्टर-19बी स्थित ‘हैप्पी होम’ नामक इमारत के एक फ्लैट में कुछ संदिग्ध युवक ठहरे हुए हैं, जिनकी गतिविधियां संदिग्ध हैं। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपायुक्त कुशाल पाल सिंह के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई। एसआई नीरज और हेडकांस्टेबल कृष्ण की टीम ने मौके पर छापा मारा। फ्लैट में 30 से अधिक युवक कंप्यूटर और मोबाइल के जरिये तकनीकी रूप से परीक्षाओं में सेंध लगाने की तैयारी कर रहे थे।
रिमोट एक्सेस से खेल : पूछताछ में गैंग सरगना 28 वर्षीय हर्ष वर्धन गुप्ता ने बताया कि वह विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं में पेपर सॉल्व कराने का नेटवर्क चलाता है। इसके लिए अलग-अलग राज्यों से मेधावी छात्रों को बुलाकर किराए के मकानों में ठहराया जाता था। परीक्षा के दौरान ये छात्र रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर और इम्पर्सनेशन तकनीक के जरिए असली अभ्यर्थियों की जगह पेपर हल करते थे, जिससे परीक्षा प्रणाली को आसानी से धोखा दिया जाता था। जांच में सामने आया कि गिरोह का सदस्य यशराज परीक्षा केंद्र और कंप्यूटर लैब की व्यवस्था संभालता था।
ऐसे फैलाता था नेटवर्क
सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल
गिरोह रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के जरिए परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेता
सॉल्वर छात्रों का चयन
गिरोह का सदस्य प्रांजल देश भर के टॉप कॉलेजों से मेधावी छात्रों को लालच देकर जोड़ता था
सेंटर मैनेजमेंट
आरोपी यशराज का काम परीक्षा केंद्रों और कंप्यूटर लैब के संचालकों को पैसे देकर मैनेज करना था
डिजिटल साक्ष्य मिटाना
आरोपियों के व्हाट्सएप पर कई अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड आए थे, जिन्हें पकड़े जाने के डर से तुरंत डिलीट कर दिया गया था
अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूलते थे आरोपी
पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली की तकनीकी खामियों का फायदा उठा रहा था। शुरुआती जांच में पता चला है कि गिरोह अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूलता था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितनी परीक्षाओं में हेराफेरी की है और परीक्षा केंद्रों के कौन-कौन से संचालक इनके साथ मिले हुए थे। छापे में सरगना सहित 32 पकड़े हैं। मामला दर्ज कर जांच जारी है।
जालसाजी में प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र शामिल
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और हरियाणा के टॉप इंजीनियरिंग संस्थानों से छात्रों को ‘सॉल्वर’ के तौर पर काम पर रखा था। इनमें आईआईटी रुड़की, एनआईटी जमशेदपुर, डीटीयू, जामिया मिलिया इस्लामिया, लॉ कॉलेज पटना, मोतीलाल नेहरू कॉलेज प्रयागराज के छात्र भी शामिल हैं, जिन्हें मोटी रकम का लालच देकर दिल्ली बुलाया गया था। ये छात्र असली अभ्यर्थियों की जगह कंप्यूटर पर बैठकर पेपर हल करते थे।

