नए नियम के तहत तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषा होना जरूरी
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यामक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने भाषा शिक्षा को लेकर बड़ा बदलाव करते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठी से तीसरी भाषा (आर3) को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। यह कदम नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 के तहत बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया है। साथ ही इसी सत्र से कक्षा नौवीं के लिए गणित और विज्ञान की दो स्तरीय प्रणाली का कार्यान्वयन शुरू किया जा रहा है।
सीबीएसई के अनुसार अब छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कम से कम एक और भाषा पढ़नी होगी। नए नियम के तहत तीन भाषाओं में से दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य होगा। इस नीति के लागू होने के बाद कक्षा छठी से शुरू होने वाला तीसरी भाषा का अध्ययन कक्षा दसवीं तक जारी रहेगा। वर्तमान में हिंदी और अंग्रेजी समेत कुल 44 भाषाएं पढ़ाई जा रही हैं। जिनमें संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाएं, अन्य क्षेत्रीय भारतीय भाषाएं और कुछ विदेशी भाषाएं भी शामिल हैं।
छात्रों का होगा समग्र विकास
कक्षा नौवीं के लिए गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली का कार्यान्वयन शुरू
: भाषा पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि छात्रों की सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने की क्षमता का समग्र विकास हो सके। इसमें आर 1, आर2 और आर3 के रूप में तीन-भाषा ढांचा तय किया है। एनसीएफएसई-2023 की सिफारिशों के अनुसार इन तीन भाषाओं में से दो भाषाएं भारत की मूल भाषाएं होनी चाहिए। बोर्ड द्वारा बहुभाषी शिक्षा के चरणबद्ध कार्यान्वयन को जारी रखते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठी से तीसरी भाषा अनिवार्य कर दी जाएगी।
चरणबद्ध सभी कक्षा में भाषा होगी अनिवार्य बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा की पढ़ाई शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठीं में अनिवार्य रूप से शुरू होगी। इसके बाद हर वर्ष इसे एक-एक कक्षा में बढ़ाया जाएगा ताकि छात्रों पर अचानक अतिरिक्त बोझ न पड़े और वह क्रमिक रूप से नई भाषा सीख सकें। जारी कार्यक्रम के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में केवल कक्षा छठीं के छात्रों के लिए आर3 अनिवार्य होगा। जबकि
सत्र 2027-28 में यह कक्षा छठी और सातवी, सत्र 2028-29 में कक्षा छठी से आठवी, सत्र 2029-30 में कक्षा छठी से नौवीं और सत्र 2030-31 तक कक्षा छठी से दसवीं तक के सभी छात्रों के लिए तीसरी भाषा अनिवार्य हो जाएगी।
सांस्कृतिक विविधता की समझ होगी मजबूत : इस नीति के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। सीबीएसई का मानना है कि इस पहल से छात्रों की भाषाई क्षमता के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विविधता की समझ भी मजबूत होगी। इस चरणबद्ध शुरुआत से पाठ्यक्रम का सुचारू रूप से परिवर्तन सुनिश्चित और माध्यमिक स्तर के मूल्यांकन सुधारों के साथ सामंजस्य स्थापित होगा।
अधिकांश किताब 10 से 15 अप्रैल तक होंगी उपलब्ध : वहीं सीबीएसई द्वारा कक्षा नौवीं और दसवीं पाठ्यक्रम जारी करने को लेकर आयोजित वेबिनार में एनसीईआरटी के निदेशक प्रोफेसर दिनेश सकलानी ने अनुसार नौवीं की किताबें तैयार हैं। प्रिंटिंग में हैं। इसमें अधिकांश किताबें 10 से 15 अप्रैल के बीच आ जाएंगी। एक से दो किताबें आने में देरी हो सकती

