11 April 2026

नोट कांड की जांच के बीच जज यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दिया

 

नोट कांड मामले में आरोपों से घिरे इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने शुक्रवार को पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भेज दिया है।



इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को भेजे त्यागपत्र में लिखा, मैं आपके कार्यालय को उन कारणों से बाध्य नहीं करना चाहता जो मुझे इस पत्र को प्रस्तुत करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। गहरे दुख के साथ मैं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र देता हूं। इस कार्यालय में सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है।


अधजले नोट मिले थे: गौरतलब है कि जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास से 15 मार्च 2025 को 500 रुपये के जले और अधजले नोट मिले थे। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। इसके बाद न्यायमूर्ति वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। उन्होंने आरोपों से इनकार किया और उसे साजिश बताया था। इस मामले ने तूल पकड़ा और विवाद संसद तक पहुंच गया था। जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित किया गया तो हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की तत्कालीन कार्यकारिणी ने इसका उग्र विरोध किया था।


इसे लेकर तत्कालीन बार अध्यक्ष अनिल तिवारी ने देशभर के हाईकोर्ट बार के पदाधिकारियों को दिल्ली बुलाकर मुख्य न्यायाधीश, केंद्रीय कानून मंत्री आदि से मिलकर अपना विरोध दर्ज कराया था। जस्टिस यशवंत वर्मा ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि यह उन्हें फंसाने की साजिश है। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने तब इन आरोपों की जांच के लिए आंतरिक जांच कराई।

महाभियोग की प्रक्रिया निष्प्रभावी हुई


जस्टिस यशवंत वर्मा के इस्तीफा देने के बाद अब लोकसभा द्वारा उन्हें पद से हटाने संबंधी प्रस्ताव पर जारी कार्यवाही स्वत: निष्प्रभावी हो गई है। वरिष्ठ अधिकारियों ने यह जानकारी दी। महाभियोग को रोकने के लिए न्यायमूर्ति के लिए इस्तीफा ही एकमात्र विकल्प बचा था। 


इस्तीफा या महाभियोग का सामना करने को कहा था


सीजेआई ने जांच रिपोर्ट आने के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा से इस्तीफा देने या महाभियोग का सामना करने को कहा। हालांकि, जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। इसके बाद सीजेआई ने रिपोर्ट और जस्टिस वर्मा की प्रतिक्रिया राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दी थी।