शासन की स्कूल वाहनों पर सख्त निर्देश के बाद जिलाधिकारी स्तर से रोजाना ऐसे वाहनों को पोर्टल पर दर्ज करने का हिसाब-किताब मांगा जा रहा है। दूसरी ओर एआरटीओ की टीम को सम्बद्ध वाहनों का ब्योरा नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि बच्चे प्रतिबंधित टेम्पो से स्कूल जाते दिखाई पड़ रहे हैं जिसमें खतरनाक तरीके से बेंच लगा दी गई है। शीशे टूटे हैं और लोहे के एंगल निकले हुए हैं।
शासन ने 15 तारीख तक आरटीओ को स्कूलों से जुड़े सभी तरह के वाहनों का ब्योरा पोर्टल पर दर्ज करने को कहा है जो बच्चों को ढो रहे हैं। शुक्रवार की शाम तक 1060 वाहन पोर्टल पर दर्ज हुए हैं। इनमें से 692 का निरीक्षण किया जा चुका है। डीएम विशाख जी ने अलग से निर्देश दिया है कि सभी तरह के वाहनों को स्कूल के दायरे में लाएं ताकि जिम्मेदारी तय हो सके। डीएम को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार अभी 1600 वाहनों की जानकारी मिली है जिनको पोर्टल पर दर्ज किया जाना है। इसके बाद छोटे वाहनों को ढूंढ़ा जाएगा जैसे ऑटो, टेम्पो या ई रिक्शा।
मिशन का ‘भरोसा’ भी टूट रहा
स्मार्ट सिटी की योजना मिशन भरोसा में भी वाहनों का ब्योरा दर्ज हो रहा है। इसमें वाहनों के साथ ड्राइवरों का पुलिस सत्यापन हो रहा है। इस योजना के तहत अभी तक अपने वाहनों और ड्राइवरों का ब्योरा देने में चंद स्कूल ही सामने आए हैं। वहीं, शिक्ष विभाग के अनुसार शहर में छोटे बड़े तीन हजार से अधिक स्कूल कॉलेज हैं। 10 लाख छात्र हैं जिनमें ज्यादातर अनुबंधित या स्कूली वाहनों से पढ़ाई करने जा रहे हैं। हाल ही में कमिश्नर की बैठक में यह सामने आया था कि पुलिस सत्यापन के दौरान 500 ड्राइवरों के खिलाफ किसी न किसी थाने में मुकदमा दर्ज मिला

