जनगणना ड्यूटी से शिक्षकों में नाराज़गी, ग्रीष्मकालीन अवकाश खत्म होने पर उठी EL देने की मांग
लखनऊ/उत्तर प्रदेश।
काफी वर्षों की देरी के बाद आयोजित की जा रही जनगणना प्रक्रिया को लेकर प्रदेश के शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि जब जनगणना लगभग 6 वर्ष लेट हो चुकी थी, तो इसे एक महीने पहले या बाद में भी कराया जा सकता था। लेकिन इसके बावजूद ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान ड्यूटी लगाकर उनके आराम के समय को समाप्त कर दिया गया।
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि उन्हें पहले से ही Earned Leave (EL) का समुचित लाभ नहीं मिलता है, और अब जो एकमात्र लंबा अवकाश मिलता है, उसे भी जनगणना कार्य में लगा दिया गया। इससे उनके मानसिक और शारीरिक संतुलन पर असर पड़ रहा है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार को इस विषय पर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और जिन शिक्षकों की छुट्टियां जनगणना कार्य में प्रभावित हुई हैं, उन्हें उसके बदले पर्याप्त EL प्रदान की जानी चाहिए।
📢 प्रमुख मांगें:
- ग्रीष्मकालीन अवकाश में ड्यूटी लगाने के बदले अतिरिक्त EL दी जाए
- भविष्य में गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए
- शिक्षकों के कार्यभार को ध्यान में रखते हुए समय-सारणी तय की जाए
शिक्षकों का कहना है कि वे हमेशा सरकारी कार्यों में सहयोग के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन उनकी मूल जिम्मेदारी शिक्षा व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाना है। ऐसे में बार-बार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाना उचित नहीं है।
✍️ निष्कर्ष:
जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में शिक्षकों की भूमिका अहम है, लेकिन उनके अधिकारों और सुविधाओं का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।

