सरकारी स्कूल से प्राइवेट में गए छात्रों की एंट्री न होने पर खड़ा हुआ बड़ा संकट
📍 रिपोर्ट:
क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की खामियां एक बार फिर सामने आई हैं। हाल ही में दो ऐसे अभिभावकों का मामला सामने आया, जिन्होंने करीब 4 वर्ष पहले अपने बच्चों का नामांकन एक विद्यालय में कराया था। कुछ समय बाद खाते में धनराशि आने पर वे बिना सूचना दिए बच्चों को प्राइवेट विद्यालय में पढ़ाने लगे।
अब जब बच्चा कक्षा 5 उत्तीर्ण कर चुका है और अभिभावक ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) लेने विद्यालय पहुंचे, तो उन्हें TC देने से मना कर दिया गया। विद्यालय प्रशासन का कहना है कि संबंधित छात्रों का नाम पोर्टल/ऐप पर कभी इम्पोर्ट ही नहीं किया गया, जिससे उनका रिकॉर्ड सिस्टम में उपलब्ध नहीं है।
स्थिति और गंभीर तब हो गई जब यह पता चला कि बच्चे पिछले 3 वर्षों से “ड्रॉप बॉक्स” में दर्ज हैं, यानी उनका विधिवत प्रवेश ही नहीं माना गया। इसके चलते छात्रों के पास न तो PEN (Permanent Education Number) है और न ही अपार (APAAR ID), जिससे उनका आगे किसी विद्यालय में प्रवेश लेना मुश्किल हो गया है।
📍 अभिभावकों की परेशानी:
इस लापरवाही के कारण अभिभावकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों का भविष्य अनिश्चित हो गया है और नए विद्यालयों में एडमिशन नहीं मिल पा रहा।
📍 सवाल खड़े:
- क्या विद्यालय प्रशासन की यह जिम्मेदारी नहीं थी कि छात्रों का समय पर डेटा अपडेट किया जाए?
- क्या शिक्षा विभाग इस तरह की समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा?
यह मामला शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल रिकॉर्ड और एडमिशन प्रक्रिया की खामियों को उजागर करता है। समय रहते सुधार न किए गए तो ऐसे और भी मामले सामने आ सकते हैं, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा।

