21 May 2026

फर्जी पीपीओ लगाकर 15 तदर्थ शिक्षकों ने हड़पी पेंशन

 ## फर्जी पीपीओ लगाकर 15 तदर्थ शिक्षकों ने हड़पी पेंशन



वाराणसी : गाजीपुर में माध्यमिक शिक्षा विभाग को लाखों का चूना लगाने वाले बड़े पेंशन घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। उपनिदेशक वाराणसी के फर्जी पेंशन प्राधिकार पत्र (पीपीओ) लगाकर तीन से चार वर्षों तक अवैध रूप से पेंशन हड़प रहे 15 तदर्थ सहायक अध्यापकों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच में दोष सिद्ध होने के बाद अब इन सभी आरोपित शिक्षकों से 20 से 25 लाख रुपये प्रति शिक्षक की दर से रिकवरी के आदेश जारी हुए हैं।

यह पूरा फर्जीवाड़ा माध्यमिक शिक्षा परिषद वाराणसी के उपनिदेशक और गाजीपुर कोषागार की संयुक्त जांच में सामने आया है। घोटाले की परत वर्ष 2018 में गाजीपुर के रुहीपुर निवासी प्रमिला देवी की शिकायत से खुली थी। उनके पति स्व. हरिद्वार राम गंगा प्रसाद राम प्रसाद यादव इंटर कालेज रुहीपुर में तदर्थ सहायक अध्यापक थे। उनकी मृत्यु 10 मई 2018 को हो गई थी। पति की मृत्यु के बाद जब प्रमिला को पारिवारिक पेंशन नहीं मिली, तो उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। उनका तर्क था कि उनके पति के साथ ही कार्यरत शिक्षक चंद्रिका सिंह यादव और सुमंत भास्कर को कोर्ट के आदेश पर पेंशन मिल रही है, तो उन्हें क्यों नहीं दी गई। तत्कालीन डीआईओएस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच बैठाई और वाराणसी के उपनिदेशक को पत्र लिखा।

अक्टूबर 2024 में जब उपनिदेशक कार्यालय और गाजीपुर कोषागार में चंद्रिका और सुमंत के पीपीओ नंबरों का मिलान किया गया तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। पता चला कि दोनों शिक्षकों के पीपीओ नंबर असल में किसी अन्य वैध पेंशनभोगियों के नाम पर पहले से ही जारी थे। यानी फर्जी नंबरों के सहारे पेंशन उठाई जा रही थी। उपनिदेशक कार्यालय से इन दोनों की पेंशन कभी स्वीकृत ही नहीं की गई थी और न ही विभाग की तरफ से इनकी फाइलें आगे बढ़ाई गई थीं।

### गाजीपुर में पेंशन घोटाला

 * एक विधवा की गुहार ने खोला माध्यमिक शिक्षा विभाग का बड़ा फर्जीवाड़ा

 * माध्यमिक शिक्षा के डीडी और कोषागार विभाग की जांच पूरी, की जाएगी रिकवरी

> 15 तदर्थ शिक्षकों द्वारा फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर पेंशन लेने के मामले की जांच पूरी हो चुकी है। अब सभी आरोपित शिक्षकों से रिकवरी कराई जा रही है।

> — दिनेश सिंह, संयुक्त निदेशक, वाराणसी मंडल, माध्यमिक शिक्षा विभाग