प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को बड़ी राहत देने की तैयारी की है। लंबे समय बाद यूपी बोर्ड अब अंग्रेजी माध्यम के छात्रों के लिए एनसीईआरटी आधारित पाठ्य पुस्तकों का प्रकाशन अंग्रेजी भाषा में कराने जा रहा है। इस फैसले से प्रदेश के करीब ढाई लाख विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
अब तक यूपी बोर्ड में अंग्रेजी माध्यम से अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के दौरान सबसे बड़ी समस्या अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकों की उपलब्धता को लेकर होती थी। विद्यालयों में पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से होती थी, लेकिन किताबें मुख्य रूप से हिंदी माध्यम में ही उपलब्ध कराई जाती थीं। ऐसे में विद्यार्थियों को बाजार से महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदनी पड़ती थीं।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद विद्यार्थियों को कम कीमत पर अंग्रेजी माध्यम की एनसीईआरटी पुस्तकें आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। हर वर्ष 50 से 52 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकरण कराते हैं। इनमें एक लाख से अधिक विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करते हैं। परिषद ने इन्हीं छात्रों की जरूरत को देखते हुए शैक्षिक सत्र 2026-27 से अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकों के प्रकाशन की तैयारी शुरू की है।
परिषद के अनुसार कक्षा 9, 10, 11 और 12 के विभिन्न विषयों की एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकें प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। खास बात यह है कि ये पुस्तकें बाजार में उपलब्ध निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की तुलना में काफी सस्ती होंगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा। अभी तक सीबीएसई पैटर्न की अंग्रेजी माध्यम की किताबें निजी बाजार में महंगे दामों पर मिलती थीं, जिसके कारण कई छात्र पूरी पुस्तकें खरीदने में सक्षम नहीं हो पाते थे। यूपी बोर्ड की ओर से कम कीमत पर पुस्तकें उपलब्ध कराए जाने से छात्रों का आर्थिक बोझ कम होगा।

