लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पड़ रही अभूतपूर्व गर्मी और लू (हीटवेव) को देखते हुए प्राथमिक एवं उच्च/पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने माननीय मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ग्रीष्मकालीन अवकाश 30 जून तक बढ़ाने की मांग की है। शिक्षकों ने इस फैसले के लिए छात्रों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और अपनी थकान एवं मानसिक तनाव को प्रमुख कारण बताया है।
पत्र में कहा गया है कि वर्तमान में पूरा प्रदेश प्रचंड लू और अत्यधिक तापमान की चपेट में है। ऐसे में छोटे बच्चों को विद्यालय बुलाना उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होगा। अत्यधिक गर्मी के कारण बच्चों में डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और बीमार होने का खतरा बढ़ गया है। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों के हित में अभी विद्यालय न खोले जाएं।
वहीं शिक्षकों ने अपनी व्यथा भी रखी। पत्र के अनुसार, बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों ने जनगणना के राष्ट्रीय महत्व के कार्य को बिना किसी परवाह के, दिन-रात मेहनत कर समय से पहले पूरा किया। इस निरंतर और अत्यधिक मानसिक व शारीरिक श्रम के कारण शिक्षक अत्यधिक थकान और तनाव से जूझ रहे हैं। कई शिक्षक अपने गृह जनपद से दूर अन्य जनपद में कार्यरत हैं, ऐसे में बिना विश्राम के उन्हें पुनः विद्यालय के प्रशासनिक व शैक्षणिक कार्यों में लगाना व्यावहारिक नहीं है।
शिक्षकों ने मुख्यमंत्री से विनम्र प्रार्थना की है कि छात्रों के स्वास्थ्य की रक्षा और शिक्षकों के अथक परिश्रम को सम्मान देते हुए प्रदेश के समस्त विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश को 30 जून तक बढ़ाया जाए। पत्र में कहा गया है कि इस संवेदनशील निर्णय के लिए पूरा शिक्षक समाज और प्रदेश के अभिभावक सदैव आभारी रहेंगे।
गौरतलब है कि प्रदेश के कई जिलों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुँच गया है, और मौसम विभाग ने आगामी दिनों में और अधिक गर्मी की चेतावनी दी है। फिलहाल प्रशासन से इस मांग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

