28 June 2026

दो हजार रुपये मानदेय में परिषदीय विद्यालयों की रसोइयों की बढ़ी मुश्किलें, सेवा शर्तें तय करने की मांग



परिषदीय विद्यालयों की रसोइयों को 2,000 रुपये मासिक मानदेय में गुजारा मुश्किल हो रहा है, क्योंकि उनकी सेवा शर्तें तय नहीं हैं।




1-रसोइयों को 2,000 रुपये मासिक मानदेय, केवल 10 माह का भुगतान।


2-सेवा शर्तें तय न होने से अवकाश, सेवानिवृत्ति में दिक्कत।


3-मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ लेने में।


राज्य ब्यूरो, लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) तैयार करने वाली रसोइयों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि आज तक उनकी सेवा शर्तें तय नहीं की गई हैं। इसके चलते मानदेय, अवकाश, सेवानिवृत्ति और अन्य सुविधाओं को लेकर वे असमंजस और परेशानियों का सामना कर रही हैं।


वर्तमान में रसोइयों को 2,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। यह भुगतान भी वर्ष में केवल 10 माह के लिए किया जाता है। गर्मी की छुट्टियों के दौरान दो माह का मानदेय नहीं मिलता।


*इसके अलावा उन्हें आकस्मिक अवकाश, चिकित्सा अवकाश, मातृत्व अवकाश या बाल्य देखभाल अवकाश जैसी कोई सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। सेवा नियम तय न होने का असर मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना पर भी पड़ रहा है।*


*सेवानिवृत्ति की आयु निर्धारित न होने के कारण कई रसोइयों को इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन करने में कठिनाई हो रही है। वहीं, सेवानिवृत्ति का कोई स्पष्ट प्रविधान न होने से कई विद्यालयों में 62 वर्ष से अधिक आयु की रसोइयां भी कार्यरत हैं।*


*इससे नई नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं और कई स्थानों पर मध्यान्ह भोजन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। रसोइयों का कहना है कि सरकार उनकी सेवा शर्तें जल्द तय करे।*


*साथ ही मानदेय में वृद्धि, विभिन्न प्रकार के अवकाश, सेवानिवृत्ति की आयु और सामाजिक सुरक्षा संबंधी स्पष्ट नियम लागू किए जाएं, ताकि वर्षों से कार्य कर रही हजारों रसोइयों को सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां और आवश्यक सुविधाएं मिल सकें।*


परिषदीय विद्यालयों में नामांकित विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर रसोइयों की तैनाती होती है। 25 बच्चों तक एक, 26 से 100 बच्चों पर दो, 101 से 200 बच्चों पर तीन तथा 201 से 300 बच्चों पर चार रसोइयां नियुक्त की जाती हैं।