इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वृद्धावस्था पेंशन योजना से जुड़े एक मामले में कहा है कि राज्य सरकार ने कोई पेंशन योजना शुरू की है और बाद में किसी पात्र व्यक्ति को यह कहते हुए पेंशन देने से इनकार करती है कि लक्ष्य पूरा हो चुका है या धन उपलब्ध नहीं है, तो इससे याची के मौलिक अधिकारों, विशेष रूप से निष्पक्ष व्यवहार के अधिकार का सवाल खड़ा होता है।
न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा एवं न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ के समक्ष चूना कंकड़ गली मथुरा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश चंद्र अग्रवाल ने कोर्ट में यह मुद्दा उठाया कि वह 60 वर्ष से अधिक आयु के होने के बावजूद पेंशन योजना के तहत अपने हकदार लाभ से वंचित हैं। याची का कहना है कि सरकार ने कहा 60 साल होते ही वृद्धावस्था पेंशन मिलेगी। याची 70साल का है। संस्तुति के बावजूद उसे पेंशन नहीं मिली। याचिका में पेंशन राशि बढ़ाने तथा प्रतिमाह भुगतान का आदेश देने की भी मांग की गई है।कोर्ट ने अपने आदेश में गत 21 मई और 11 मई के पूर्व के आदेशों का हवाला दिया। इनमें कहा गया कि राज्य के स्थायी अधिवक्ता शरद चंद्र उपाध्याय ने कोर्ट को सूचित किया था कि याची का दावा विचाराधीन है।

