28 August 2026

डिजिपिन पते को नई पहचान देगा: हर व्यक्ति को मिलेगा डिजिपिन, डाक विभाग जल्द शुरू करेगा व्यापक अभियान

 

डाक विभाग देशभर में लोगों के पतों की पहचान को अधिक सटीक बनाने के लिए डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर (डिजिपिन) पर काम कर रहा है। इसके जरिए हर व्यक्ति के पते को डिजिटल पहचान देने के लिए डिजिपिन दिया जाएगा। इसके बाद डाक विभाग और अन्य मंत्रालयों की सेवाएं सटीक तरीके से लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। डिजिपिन आधार नंबर, पैन नंबर की तरह एक कोड होगा, जिसमें किसी भी व्यक्ति का पता दर्ज होगा।



डिजिपिन की सबसे बड़ी खासियत होगी कि किसी भी सामान का ऑर्डर करते वक्त व्यक्ति को अपना पूरा पता लिखने की जरूरत नहीं होगी। बस डिजिपिन लिखना होगा और संबंधित व्यक्ति का ऑर्डर निर्धारित पते पर पहुंच जाएगा। डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि डिजिपिन को लेकर व्यापक स्तर पर काम चल रहा है। इसके लाभ अकेले डाक विभाग को नहीं, बल्कि अन्य विभागों को भी मिलेगा। इसलिए सभी मंत्रालयों और विभागों को भी जोड़ा जा रहा है, जिससे कि उनकी सेवाएं और योजनाओं का लाभ भी डिजिपिन के जरिए आप लोगों तक पहुंच सके। साथ ही, विभागों को डिजिपिन के माध्यम से अपने कार्यों की निगरानी करने में मदद मिल सके।


क्या है डिजिपिन की आधुनिक व्यवस्था


डिजिपिन एक ओपन-सोर्स, इंटरऑपरेबल, जियो-कोडेड, ग्रिड-आधारित डिजिटल एड्रेस सिस्टम है जिसे डाक विभाग ने आईआईटी हैदराबाद व एनआरएससी इसरो के सहयोग से विकसित किया है। यह किसी स्थान की सटीक भौगोलिक स्थिति को एक डिजिटल कोड से जोड़ता है। डिजिपिन से सामान की


डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स, आपातकालीन


सेवाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ सही स्थान तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इससे अंतिम छोर तक सेवा पहुंचाने में आसानी होगी। इसलिए यूपीआई की तर्ज पर डिजिपिन का एक ढांचा तैयार किया जाएगा। जहां से डिजिपिन से जुड़े कार्यों का संचालन और निगरानी होगी।


डाक विभाग दो वर्ष के लिए चलाएगा अभियान


लोग अपना स्वयं का डिजिपिन तैयार कर सकें इसके लिए आने वाले दिनों में डाक विभाग दो वर्ष का एक विशेष अभियान चलाएगा, जिसमें लोगों को जागरूक किया जाएगा कि वह अपना डिजिपिन बनाकर उसमें स्थाई और अस्थाई पता दर्ज करें। एक बार डिजिपिन बनने पर उसे पता बदलने की भी सुविधा रहेगी। अभियान शुरू करने को लेकर तैयारी चल रही है।


डाकिया समय पर पहुंचा पाएगा डाक


डाक विभाग के लिहाज से देखा जाए तो डिजिपिन के माध्यम से डाक किसी भी व्यक्ति की सटीक लोकेशन का पता कर पाएगा और वहां पर निर्धारित समय पर डाक पहुंचा पाएगा। इसके लिए डाकिए को सिर्फ डाक लिफाफे पर दर्ज डिजिपिन को मोबाइल ऐप पर दर्ज करना होगा। उसके बाद मैप उस जगह की सटीक लोकेशन खोलकर देगा। डिजिपिन को अतिरिक्त पते के रूप में इस्तेमाल करने से भौगोलिक सूचना प्रणाली यानी जीआईएस आधारित सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा।


नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। डाक विभाग देशभर में लोगों के पतों की पहचान को अधिक सटीक बनाने के लिए डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर (डिजिपिन) पर काम कर रहा है। इसके जरिए हर व्यक्ति के पते को डिजिटल पहचान देने के लिए डिजिपिन दिया जाएगा। इसके बाद डाक विभाग और अन्य मंत्रालयों की सेवाएं सटीक तरीके से लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। डिजिपिन आधार नंबर, पैन नंबर की तरह एक कोड होगा, जिसमें किसी भी व्यक्ति का पता दर्ज होगा।


डिजिपिन की सबसे बड़ी खासियत होगी कि किसी भी सामान का ऑर्डर करते वक्त व्यक्ति को अपना पूरा पता लिखने की जरूरत नहीं होगी। बस डिजिपिन लिखना होगा और संबंधित व्यक्ति का ऑर्डर निर्धारित पते पर पहुंच जाएगा। डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि डिजिपिन को लेकर व्यापक स्तर पर काम चल रहा है। इसके लाभ अकेले डाक विभाग को नहीं, बल्कि अन्य विभागों को भी मिलेगा। इसलिए सभी मंत्रालयों और विभागों को भी जोड़ा जा रहा है, जिससे कि उनकी सेवाएं और योजनाओं का लाभ भी डिजिपिन के जरिए आप लोगों तक पहुंच सके। साथ ही, विभागों को डिजिपिन के माध्यम से अपने कार्यों की निगरानी करने में मदद मिल सके।