07 August 2026

हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जांच में सही जन्मतिथि मिली, जारी हुई संशोधित मार्कशीट


वाराणसी : माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की लिपिकीय त्रुटि के कारण एक छात्र की हाईस्कूल की मार्कशीट में जन्मतिथि गलत दर्ज हो गई। इसके चलते रिकॉर्ड में वह महज नौ वर्ष की उम्र में हाईस्कूल पास करने वाला छात्र बन गया। 14 वर्षों तक चली प्रशासनिक प्रक्रिया और इलाहाबाद हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बोर्ड ने जन्मतिथि में संशोधन कर नई मार्कशीट और सह-प्रमाणपत्र जारी कर दिया।


मामला जौनपुर के दुर्ग देव जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है। 2008 में संस्थागत छात्र के रूप में हाईस्कूल परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले मनीष कुमार सिंह की मार्कशीट में जन्मतिथि 21 मई 1999 दर्ज हो गई थी। विद्यालय के अभिलेखों के अनुसार उनकी सही जन्मतिथि 21 मई 1993 थी। गलत जन्मतिथि के अनुसार उन्होंने नौ वर्ष की आयु में हाईस्कूल परीक्षा पास की थी। नियम के अनुसार त्रुटि सुधार के लिए तीन वर्ष के भीतर आवेदन करना था। मनीष ने वर्ष 2012 में आवेदन किया, लेकिन यूपी बोर्ड ने समयसीमा समाप्त होने का हवाला देकर उसे निरस्त कर दिया। लंबे समय तक अधिकारियों से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने वर्ष 2021 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। सात मई 2026 को सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तरदायी अधिकारी से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा। अदालत ने पूछा कि नौ वर्ष के बच्चे को हाईस्कूल का प्रमाणपत्र कैसे जारी कर दिया गया और मूल अभिलेखों की जांच कर सही स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

कोर्ट के आदेश के बाद क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी के उप सचिव ने पांच जून 2026 को जौनपुर के संबंधित विद्यालयों दुर्ग देव जनता इंटर कालेज, बाबा फक्कड़ दास पूर्व माध्यमिक विद्यालय और प्राथमिक विद्यालय कल्याणपुर में स्थलीय जांच की। कक्षा आठ की टीसी और अन्य अभिलेखों की जांच में छात्र की वास्तविक जन्मतिथि 21 मई 1993 पाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर पत्रावली परिषद मुख्यालय प्रयागराज भेजी गई। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद मनीष कुमार सिंह को संशोधित जन्मतिथि के साथ नई मार्कशीट और सह-प्रमाणपत्र जारी किया गया।

  • 2008 में हाईस्कूल पास करने वाले छात्र की मार्कशीट में जन्मतिथि गलत दर्ज हुई थी

  • हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जांच में सही जन्मतिथि मिली, जारी हुई संशोधित मार्कशीट

छात्र को संशोधित मार्कशीट जारी कर दी गई है। मामला तकनीकी रूप से समयसीमा से बाहर था, फिर भी इसकी गंभीरता को देखते हुए विशेष प्राथमिकता पर कार्यवाही की गई। बोर्ड प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि छात्रों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए।
—भास्कर मिश्र, अपर सचिव, वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय