26 साल नौकरी… फिर खुला रिकॉर्ड का राज! फर्जी शैक्षिक अभिलेख के आरोप में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की सेवाएं खत्म
हरदोई। बाल विकास पुष्टाहार विभाग में करीब 26 साल तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में नौकरी करने वाली कमला सिंह के मामले में जांच के बाद बड़ी कार्रवाई हुई है। फर्जी शैक्षिक अभिलेखों के सहारे नौकरी हासिल करने के आरोप की जांच में अभिलेखों का सत्यापन कराया गया, जिसके बाद उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
शिकायत से शुरू हुई जांच, सत्यापन में सामने आया मामला
मामला तब सामने आया जब देवरानी राजरानी ने जिलाधिकारी से शिकायत की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कमला सिंह ने फर्जी शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर नौकरी हासिल की थी।
शिकायत के बाद मामले की जांच के निर्देश दिए गए। बाल विकास परियोजना अधिकारी ने संबंधित शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन कराया।
1988 के रिकॉर्ड में नहीं मिला नाम
जांच में वर्ष 1988 के अनुक्रमांक संख्या 31045 से संबंधित रिकॉर्ड में कमला सिंह का नाम दर्ज नहीं मिला। इसके बाद सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, इसी क्रम में कमला सिंह की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद से सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
26 साल की नौकरी पर लगा ब्रेक
कमला सिंह की नियुक्ति वर्ष 2000 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में हुई थी। यानी करीब 26 वर्षों तक नौकरी करने के बाद शैक्षिक अभिलेखों से जुड़ी शिकायत ने पूरे मामले को जांच के घेरे में ला दिया।
मामले में शिकायतकर्ता की ओर से देवरानी के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराने की जानकारी समाचार-कतरन में दी गई है और प्रकरण की जांच जारी है।
अब विभागीय जांच पर नजर
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 26 साल पहले हुई नियुक्ति के दौरान शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन कैसे हुआ और अब जांच में क्या सामने आया? फिलहाल विभागीय कार्रवाई के बाद आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।
एक शिकायत → दस्तावेजों का सत्यापन → रिकॉर्ड में नाम नहीं मिला → 26 साल पुरानी नौकरी पर कार्रवाई!

