बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में घटे 22 लाख विद्यार्थी, सरकारी स्कूलों में नामांकन को लेकर बढ़ी चिंता
School Enrollment News: उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या में बड़ी गिरावट सामने आई है। यू-डायस (UDISE+) पोर्टल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में करीब 22 लाख विद्यार्थियों का नामांकन कम हुआ है। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का स्कूलों से कम होना शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है।
बेसिक शिक्षा में 16.28 लाख विद्यार्थियों की कमी
रिपोर्ट के अनुसार, शैक्षिक सत्र 2025-26 में प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में 4,24,88,896 विद्यार्थी नामांकित थे। वहीं 2026-27 में यह संख्या घटकर 4,02,71,258 रह गई।
इस तरह बेसिक शिक्षा में कुल 22,17,638 विद्यार्थियों की कमी दर्ज की गई है। इनमें से अकेले 16,28,499 विद्यार्थियों का नामांकन कम हुआ है।
माध्यमिक शिक्षा में भी 5.89 लाख की गिरावट
माध्यमिक शिक्षा में भी नामांकन के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। पिछले शैक्षिक सत्र में माध्यमिक विद्यालयों में 1,68,38,897 विद्यार्थी दर्ज थे। इस बार यह संख्या घटकर 1,62,49,758 रह गई।
यानी माध्यमिक शिक्षा में 5,89,139 विद्यार्थियों की कमी आई है।
10 जिलों में सबसे ज्यादा गिरावट
आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के कई जिलों में विद्यार्थियों की संख्या में भारी कमी दर्ज की गई है। गोरखपुर और आजमगढ़ समेत 10 जिलों में सबसे अधिक गिरावट सामने आई है।
टॉप-10 जिलों में कमी का आंकड़ा:
- गोरखपुर: 88,423 विद्यार्थी
- आजमगढ़: 86,163 विद्यार्थी
- गोंडा: 72,726 विद्यार्थी
- प्रयागराज: 72,538 विद्यार्थी
- मऊ: 68,721 विद्यार्थी
इसके अलावा हरदोई जिले में भी 43,671 विद्यार्थियों की कमी दर्ज की गई है।
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हरदोई में भी 43 हजार से ज्यादा छात्र घटे
हरदोई जिले के आंकड़ों पर नजर डालें तो शैक्षिक सत्र 2025-26 में 7,80,519 विद्यार्थी पंजीकृत थे। 2026-27 में यह संख्या घटकर 7,36,848 रह गई।
इस प्रकार हरदोई में कुल 43,671 विद्यार्थियों की कमी हुई है।
स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने की चुनौती
सरकार की ओर से हर वर्ष 'स्कूल चलो अभियान' सहित कई अभियान चलाकर बच्चों को विद्यालयों से जोड़ने और नामांकन बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। इसके बावजूद यू-डायस पोर्टल के आंकड़ों में विद्यार्थियों की संख्या में इतनी बड़ी गिरावट सामने आना कई सवाल खड़े करता है।
रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई है कि एक ही साल में 22 लाख से अधिक बच्चों का नामांकन कम होना केवल आंकड़ों का बदलाव नहीं, बल्कि बच्चों के स्कूल से बाहर होने या सिस्टम में उनका नामांकन दर्ज न होने जैसी स्थितियों की ओर भी संकेत कर सकता है।
अब शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना होगी कि विद्यार्थियों की संख्या में इतनी बड़ी कमी के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और कितने बच्चे वास्तव में स्कूल छोड़ चुके हैं तथा कितने विद्यार्थी केवल पोर्टल पर नामांकित नहीं हो पाए हैं।

