08 October 2026

झटका : छह बड़े बैंकों ने तुरंत बढ़ा दीं ब्याज दरें, फ्लोटिंग दर वाले कर्ज पर दिखेगा इसका सीधा असर

 



नई दिल्ली,   आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को स्पष्ट किया कि मौजूदा आर्थिपरिस्थितियों में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है। केंद्रीय बैंक ने आठ साल बाद अपनी मौद्रिक नीति का रुख ‘तटस्थ’ से बदलते हुए ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी ‘संतुलित सख्ती’ अपनाने का फैसला किया है।


मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद मल्होत्रा ने कहा आगे की नीतिगत कार्रवाई या तो रेपो रेट में बढ़ोतरी हो सकती है, या फिर यथास्थिति बनाए रखी जा सकती है। दरों में कटौती विकल्पों में शामिल नहीं है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र कितना लंबा चलेगा और इसकी सीमा क्या होगी, यह आने वाले समय में आर्थिक वृद्धि की स्थिति पर निर्भर करेगा। आर्थिक गतिविधियां मजबूत रहने के बावजूद महंगाई का दबाव व्यापक हुआ है। हाल ही में अमेरिका ने ब्याज दरें बढ़ाई हैं, जिससे बॉन्ड यील्ड भी बढ़ी है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से भारत जैसे उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी निकलने और रुपये पर दबाव का जोखिम बढ़ता है।


त्योहारों से पहले पुराने ऋण की किस्त और नया कर्ज महंगा होना शुरू हो गया है। आरबीआई द्वारा बुधवार को रेपो दर में बढ़ोतरी के तुरंत बाद ही देश के छह बड़े बैंकों ने कर्ज की ब्याज दरें बढ़ा दीं। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जिन्होंने फ्लोटिंग दर पर कर्ज लिया है। नई ब्याज दरें लागू हो गई हैं।


इन बैंकों ने अपनी रेपो आधारित ऋण दरों (आरएलएलआर और आरबीएलआर) में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की है। पंजाब नेशनल बैंक ने आरएलएलआर 8.10 फीसदी से बढ़ाकर 8.35 फीसदी कर दी है। इसी तरह इंडियन बैंक ने आरबीएलआर 7.95 फीसदी से बढ़ाकर 8.20 फीसदी, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 7.90 फीसदी से बढ़ाकर 8.15 फीसदी, बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक ने भी आरबीएलआर बढ़ाकर 8.35 फीसदी कर दी है। निजी क्षेत्र के तमिलनाडु मर्केंटाइल बैंक ने भी आरएलएलआर 8.25 फीसदी से बढ़ाकर 8.50 फीसदी कर दी है।



­विशेषज्ञों के अनुसार, रेपो दर में बढ़ोतरी का सीधा असर रेपो से जुड़े होम लोन, पर्सनल लोन और अन्य फ्लोटिंग दर वाले कर्ज पर पड़ सकता है।


एचडीएफसी ने दरें घटाईं: एचडीएफसी बैंक ने अलग-अलग अवधि के कर्ज की ब्याज दरों में 5 से 15 आधार अंक की कटौती की है। नई दरें लागू हो गई हैं। इसका फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा, जिनका कर्ज सीमांत लागत आधारित (एमसीएलआर) मानक से जुड़ा है।


दरों में और बढ़ोतरी संभव


विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्रीय बैंक अगले कुछ महीनों में रेपो दर में आधा प्रतिशत से 0.75 प्रतिशत की और बढ़ोतरी कर सकता है। यह चालू वित्त वर्ष के दौरान छह फीसदी तक हो सकती है। एसबीआई का मानना है कि आरबीआई अगली बैठक में रेपो दर में 0.50% की बड़ी बढ़ोतरी कर सकता है।


अभी क्या करें कर्जदार

विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे पहले ग्राहक यह देखें कि उनका कर्ज किस बाहरी बेंचमार्क से जुड़ा है। इसके बाद बैंक से पूछें कि ब्याज दर बढ़ने पर ईएमआई बढ़ेगी या कर्ज की अवधि। बैंक कई बार ईएमआई को समान रखने के लिए लोन की अवधि बढ़ा देते हैं। इससे हर महीने की ईएमआई में बड़ा बदलाव नहीं दिखता, लेकिन लंबे समय में ग्राहक को ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ सकता है। इससे बचने के लिए अवधि बढ़ाने के बजाय ईएमआई बढ़ा सकते हैं।